समालखा से अशोक शर्मा की रिपोर्ट : स्थानीय गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के प्रधान जगतार सिंह बिल्ला ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के फैसले पर आपत्ति जताई है कि सिख पहचान के लिए ‘सिंह’ या ‘कौर’ उपनाम अनिवार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले से सिखों को दिलो को भारी ठेस पहुंची है।इस फैसले को तुरंत वापिस लिया जाना चाहिए।
बिल्ला ने कि सिख पहचान सांसारिक अदालतों के अधीन नहीं है, बल्कि सिख गुरुओं द्वारा आशीर्वादित आचरण पर आधारित है। बिल्ला ने कहा कि दिल्ली सिंख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सहित और संस्थानों ने इस फैसले के खिलाफ भारी ऐतराज जताते हुए उक्त फैसले को कानूनी तौर पर चुनौती देने का फैसला किया है। उन्होंने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के फैसले को सिक्खों के धार्मिक मामलों पर सीधा हमला बताते हुए एसजीपीसी को इसे चुनौती देने के लिए कानूनी पहलू तलाशने का आग्रह किया है।
बिल्ला ने कहा कि किसी सिख के नाम का अर्थ सिंह या कौर के बिना नहीं लगाया जा सकता है और उच्च न्यायालय का आदेश सिख सिद्धांतों और परंपराओं का उल्लंघन है और इससे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। बिल्ला ने संभावना जताई कि हाईकोर्ट के जज साहिबान को शायद सिक्ख परम्परा और इतिहास बारे जानकारी ही न मालूम हो।