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आज 13 तारीख और शुक्रवार का भी दिन, बदकिस्मती और तबाही माना जाता है फ्राइडे… सनातम धर्म में क्या मानते हैं?

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दुनियाभर में 13 तारीख और शुक्रवार के मेल को लेकर लोग अक्सर डर और संकोच का सामना करते हैं। सैकड़ों वर्षों से इस दिन को अशुभ माना गया है, जिसमें अंधविश्वास, मिथक और डर फैल गया है। ज्यादातर लोग इस दिन से बचने की कोशिश करते हैं—होटलों में 13वें कमरे से लेकर इमारतों में 13वें फ्लोर तक की अनुपस्थिति तक। यहां तक कि विमान में भी लोग 13वीं पंक्ति में बैठने से घबराते हैं।

यूरोपीय देशों में 13 तारीख को शुक्रवार के साथ जोड़कर इसे ‘फ्राइडे द थर्टिंथ’ कहते हैं—जहां लोग इस दिन के बुरे संकेतों को जोड़ते हैं। गणितीय दृष्टिकोण से, 12 को पूर्णांक माना जाता है, जबकि 13 संतुलन की कमी का प्रतीक है। इसके अलावा, शुक्रवार को ईसा मसीह की सूली पर चढ़ाई का दिन माना जाता है, जिससे लोग इसे अशुभ मानते हैं। इसी के साथ जुडास को भी 13वां शिष्य माना गया, जिसने जीसस के साथ गद्दारी की थी।

सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण

हालांकि, कई संस्कृतियों में यह दिन विशेष महत्व रखता है। हिंदू धर्म में 13वां दिन त्रयोदशी को भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित होता है। थाई मान्यता में, 13 अप्रैल को नए साल का जश्न मनाया जाता है। ग्रीस में भी इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है।

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संयोग और दुर्घटनाएं

वर्ष 1307 में फ्रांस में ‘फ्राइडे द थर्टिंथ’ पर बड़ी दुर्घटना हुई थी, जिसे लोग इस दिन की बुरी किस्मत से जोड़ते हैं। हालांकि, अध्ययन यह साबित नहीं कर पाए कि इस दिन दुर्घटनाएं अधिक होती हैं। एक डच इंश्योरेंस कंपनी का कहना है कि इस दिन होने वाली दुर्घटनाएं सामान्य दिनों के मुकाबले कम होती हैं, शायद इसलिए कि लोग घर पर ही रहते हैं और अधिक सतर्क होते हैं।

फिल्म और मिथक

हॉरर फिल्म ‘फ्राइडे द थर्टिंथ’ ने इस मिथक को और बढ़ाया है। फिल्म की सफलता और इसके 12 सीक्वल ने इस डर को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दिन को लेकर फैले मिथक और अंधविश्वास सिर्फ 13 तारीख और शुक्रवार तक सीमित नहीं हैं; इसके सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट होते हैं, खासकर पश्चिमी देशों में।

यह दिलचस्प है कि इस डर को फैलाने वाले मिथक और सांस्कृतिक मान्यताएं विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में समान नहीं हैं। यही कारण है कि एक दिन, जो कई लोगों के लिए सिर्फ एक तारीख होती है, कुछ देशों और समुदायों के लिए विशेष भय का प्रतीक बन गया है।

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