भारतीय कुश्ती संघ (डब्लयूएफआई) और पहलवानों के बीच चल रहे विवाद के चलते रेसलरों का मनोबल कमजोर हो रहा है। रोहतक के छोटूराम स्टेडियम में आयोजित कुश्ती प्रशिक्षण में शामिल पहलवानों और उनके अभिभावकों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि इस विवाद के कारण उन्हें बड़ा नुकसान हो रहा है। इससे पहले एक साल से कोई भी महत्वपूर्ण प्रतियोगिता नहीं हुई है और अब आने वाली अलग-अलग प्रतियोगिताओं के बारे में भी समझ में नहीं आ रहा है। पहलवानों के लिए यह एक मुश्किल समय है।
विवाद के बीच भारतीय कुश्ती संघ (डब्लयूएफआई) ने 29 से 31 जनवरी को पुणे, महाराष्ट्र में नेशनल गेम्स का आयोजन करने का ऐलान किया है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने कुश्ती संघ की कार्यकारिणी को निलंबित करने के बाद भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने 2 से 5 फरवरी तक राष्ट्रीय चैम्पियनशिप का आयोजन करने की घोषणा की है। पहलवानों को बताया गया है कि वे निलंबित महासंघ के साथ कोई संबंध नहीं रखें। इससे पहलवानों को समझ में नहीं आ रहा है कि वे किस दिशा में बढ़ें।महिला पहलवान खासकर परेशान हैं, क्योंकि उन्हें विवाद की सीधी और संबंधित प्रभावित होने का खतरा है। इस बीच प्रतियोगिता होने की सूचना से खिलाड़ियों में नई ऊर्जा आई थी, उसकी बजाय अब ह्रासमेंट का सामना कर रही हैं। महिला पहलवान ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि उनका सपना है कि वे चैम्पियनशिप में भाग लें और अपनी क्षमताओं को साबित करें।

सरकार को समय पर लेना चाहिए निर्णय
गांव जसिया के निवासी वीरेंद्र ने बताया कि उनकी बेटी मुस्कान (59 किलोग्राम भार वर्ग) पिछले 7 साल से कुश्ती का अभ्यास कर रही हैं। मुस्कान को अंडर-20 की नेशनल चैम्पियनशिप में चयन हुआ था। इसके बावजूद विवाद के चलते प्रतियोगिता होने में बड़ा असमर्थ रह रहे हैं और बच्चों को नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि सरकार को समय पर निर्णय लेना चाहिए, ताकि बच्चों को अधिक हानि न हो।

दूसरे स्थानों पर कैंप लगाया होगा बेहतर
गांव टिटौली के निवासी अजय ने भी बताया कि उनकी बेटी (65 किलोग्राम भार वर्ग) भी प्रतियोगिता के लिए तैयार थी, लेकिन प्रतियोगिता को रद्द कर दिया गया। इससे बच्चों की मोटिवेशन में कमी हो रही है। गांव चिड़ी के निवासी बिजेंद्र ने यूपी में नहीं लगने वाले नेशनल कैंप पर राय दी है। उनका कहना है कि यूपी के विवाद के बीच कैंप लगाने से पहलवानों को नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार दूसरे स्थानों पर कैंप लगाना बेहतर होगा, ताकि पहलवानों को भावी प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी करने का मौका मिल सके। पहलवानों और उनके परिवारों का यह कहना है कि चैम्पियनशिप होनी चाहिए, चाहे वह उत्तर प्रदेश में हो या किसी अन्य स्थान पर। उन्होंने इसे बच्चों के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना है।