पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रक्रियात्मक नियमों का हवाला देते हुए नूंह और गुरुग्राम में सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर संज्ञान लिया है। जिसके चलते सुनवाई को स्थगित कर दिया गया है। अब इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस कोर्ट में होगी। वहीं सरकार ने मामले में हाईकोर्ट से समय की मांग की है। एडिशनल एजी का कहना है कि अगली सुनवाई 16 अगस्त को हो सकती है।
नूंह हिंसा के बाद बुलडोजर कार्यवाही मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित डिवीजन बेंच ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एडिशनल एजी दीपक सबरवाल ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि नूंह में की गई बुलडोजर कार्रवाई नियमों के तहत की गई है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया। वहीं हाईकोर्ट ने 7 अगस्त को बुलडोजर कार्रवाई मामले में रोक लगा दी थी।
सरकार की बुलडोजर कार्रवाई में कितने भवनों को गिराया
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नूंह हिंसा के बाद संबंधित अधिकारियों से हलफनामा मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि नूंह हिंसा के बाद गुरुग्राम और मेवात में कितने भवनों, मकानों व दुकानों को गिराया गया है। सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई करने से पहले किसी को नोटिस जारी किया है या नहीं?
जवाब दाखिल के लिए सरकार ने मांगा समय
सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई मामले में जवाब दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट से समय की मांग की है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान एडिशनल एजी दीपक ने सरकार की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया। एडिशनल एजी दीपक ने बताया कि चीफ जस्टिस के सामने इस मामले की सुनवाई 16 अगस्त को हो सकती है। जहां पर जवाब दाखिल किया जाएगा।
57 एकड़ से अधिक क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाने का दावा
हिंसा के बाद नूंह और गुरुग्राम क्षेत्र में सरकार की ओर से अवैध भवनों को गिराने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की गई थी। सरकार की ओर से 57 एकड़ से अधिक क्षेत्र में अवैध निर्माण को हटाने का दावा किया जा रहा है। वहीं हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए बुलडोजर की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी। हाईकोर्ट की ओर से सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था।