Haryana के भिवानी जिले के गांव पुर में पवन कुमार ने अपनी दोनों बेटियों की शादी से पहले एक अनोखी पहल की। पारंपरिक रस्म को बदलते हुए उन्होंने अपनी बेटियों को घोड़ी पर बिठाकर गांव में घुड़चढ़ी निकाली। आमतौर पर यह रस्म केवल लड़कों की शादी में निभाई जाती है।
पवन कुमार का कहना है कि यह पहल बेटियों को समाज में समान दर्जा देने के लिए की गई। उन्होंने अपनी बेटियों को बेटों की तरह पाला और उनकी इच्छा थी कि उनकी भी घुड़चढ़ी निकाली जाए। इस पहल ने क्षेत्र में लिंग समानता का संदेश दिया और बेटियों के सम्मान को बढ़ावा दिया।

‘हर घर बेटी के नाम’ पहल का प्रभाव
इससे पहले गांव में ‘हर घर बेटी के नाम’ अभियान चलाया गया था, जिसमें घरों के बाहर बेटियों के नाम की नेमप्लेट लगाई जाती है। इस पहल का उद्देश्य लड़कियों की पहचान और सम्मान को बढ़ावा देना है।
परिवार का संदेश
पवन कुमार के परिवार ने कहा कि बेटियां भी हर सम्मान और अवसर की हकदार हैं। उन्होंने इस घुड़चढ़ी के जरिए समाज को संदेश दिया कि लड़के और लड़कियों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

समाज में सकारात्मक बदलाव
यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है, जिससे यह संदेश मिलता है कि बेटियां बराबरी की अधिकारी हैं और उन्हें भी वही सम्मान मिलना चाहिए जो बेटों को मिलता है।