हरियाणा के Sonipat में आज अरविंद केजरीवाल के खिलाफ यमुना नदी में जहर मिलाने के बयान को लेकर सुनवाई होनी थी, लेकिन वे खुद कोर्ट में पेश नहीं हुए। उनकी ओर से वकील ने कोर्ट में ऑब्जेक्शन एप्लिकेशन लगाई, जिसमें कहा गया कि यह मामला एमपी या एमएलए के खिलाफ है, इसलिए इसे विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में सुना जाना चाहिए। सरकारी वकील ने इस एप्लिकेशन का जवाब देने के लिए समय मांगा, और कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 31 मई 2025 तय कर दी।
वकील का तर्क और सरकार का जवाब
केजरीवाल के वकील ने कोर्ट में यह तर्क रखा कि एमपी और एमएलए के खिलाफ मामलों को विशेष कोर्ट में ही सुना जा सकता है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में आदेश दिया गया था। वहीं सरकारी वकील ने कहा कि अरविंद केजरीवाल इस समय न तो सांसद हैं और न ही विधायक, इसलिए विशेष कोर्ट की जरूरत नहीं है।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन की याचिका
सिंचाई विभाग के एक्सईएन आशीष कौशिक ने यह याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने केजरीवाल के बयान को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि अरविंद केजरीवाल का बयान गलत था और इससे यमुना नदी के पानी के बारे में भ्रम फैल रहा था। इस बयान के कारण लोगों में डर पैदा हो गया था, जो कि गलत जानकारी पर आधारित था।
कुरुक्षेत्र में भी केजरीवाल के खिलाफ एफआईआर
अरविंद केजरीवाल के खिलाफ 4 फरवरी को कुरुक्षेत्र के शाहबाद थाने में भी एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केजरीवाल के बयान को मानहानि का मामला बताते हुए उनसे माफी की मांग की थी, नहीं तो मानहानि का केस करने की चेतावनी दी थी।
अगली सुनवाई 31 मई को
इस मामले में अगली सुनवाई 31 मई को होगी, जहां वकीलों की ओर से ऑब्जेक्शन एप्लिकेशन का जवाब दिया जाएगा और मामला आगे बढ़ेगा।