- पीजीआई चंडीगढ़ ने भारत की पहली रोबोटिक वासोवासोस्टमी (नसबंदी रिवर्सल) सर्जरी सफलतापूर्वक की।
- 43 वर्षीय मरीज की नसबंदी को रोबोट की मदद से रिवर्स कर फिर से पिता बनने की संभावना बनाई गई।
- यह तकनीक परंपरागत माइक्रो सर्जरी की तुलना में अधिक सटीक, सुरक्षित और असरदार मानी जा रही है।
चंडीगढ़ स्थित पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग ने भारत में पहली बार रोबोटिक वासोवासोस्टमी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। 9 जुलाई 2025 को 43 वर्षीय मरीज, जिसने पहले पुरुष नसबंदी करवाई थी, की प्रजनन क्षमता बहाल करने के लिए यह सर्जरी की गई। मरीज को अगले दिन ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जो इस तकनीक की कुशलता को दर्शाता है।
इस सर्जरी को डॉक्टर आदित्य प्रकाश शर्मा, डॉ. गिरधर बोरा और प्रो. रवी मोहन की टीम ने मिलकर अंजाम दिया। आमतौर पर माइक्रोस्कोप की मदद से होने वाली वासोवासोस्टमी को अब Da Vinci रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की मदद से अति-सटीकता के साथ किया गया। इस प्रक्रिया में मानव शरीर के बाल से भी पतले टांकों का उपयोग कर शुक्रवाहिनी (Vas Deferens) के कटे सिरों को पुनः जोड़ा गया, जिससे मरीज की प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना फिर से बहाल हो सकी।
डॉक्टरों के अनुसार, रोबोटिक प्रणाली सर्जन के हाथों के कंपन को कम करती है और सर्जरी में अधिक नियंत्रण और स्पष्टता प्रदान करती है। यह तकनीक उन दंपतियों के लिए नई उम्मीद है जो नसबंदी के बाद संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं।
प्रोफेसर रवी मोहन ने कहा कि यह उपलब्धि केवल कैंसर ही नहीं, बल्कि एंडोलॉजी और माइक्रो सर्जरी क्षेत्रों में भी रोबोटिक तकनीक के क्रांतिकारी उपयोग का संकेत देती है। पीजीआई अब इस केस को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की योजना बना रहा है, जिससे यह तकनीक वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय तक पहुंच सके।