Maa Barahi Devi

Maa Barahi Devi के समक्ष शरीर की बीमारियां होती हैं दूर, जानियें कैसे लौटती है आंखों की रोशनी

देश धर्म पानीपत बड़ी ख़बर हरियाणा

दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है, जहां मान्यता है कि मंदिर में मौजूद करीब अठारह सौ वर्ष पुराने वटवृक्ष से निकलने वाले दूध को आंखों में डालने से नेत्रहीनों को रोशनी मिल जाती हैं। देश भर के इक्यावन शक्तिपीठों में से यह चौंतीसवां शक्तिपीठ है।

बता दें कि बाराही देवी या उत्तरीभवानी नाम से मशहूर यह मंदिर वह स्थान है, जहां देवी माह का जबड़ा गिरा था। यह मंदिर गोंडा से सटे बेलसर इलाके के उमरीबेगमगंज गांव में मौजूद हैं। मंदिर के पुजारी का कहना है कि जो अंग जहां गिरा, वहीं पूज्य है। मंदिर एक वटवृक्ष से घिरा है, जो करीब एक किलोमीटर तक फैला हुआ हैं। यह वृक्ष एशिया का दूसरा सबसे बड़ा वटवृक्ष हैं। मंदिर में देवी के दर्शन से कई लोगों की गंभीर बीमारियां ठीक हो चुकी हैं।

1e2a13d79379b98056b3e2392328d11d

मंदिर में हर धर्म के लोग पहुंचते है और यहां कभी कोई धार्मिक विवाद नहीं हुआ। मंदिर में हर सप्ताह सोमवार और शुक्रवार को भीड़ उमड़ती हैं, लेकिन नवरात्रि के दिनों में भीड़ की तादात काफी बढ़ जाती हैं। इसी इलाके सरयू नदी के उत्तर में राजापुर गांव में गोस्वामी तुलसीदास का जन्म हुआ था। यहां तक पहुंचने के लिए अपना साधन होना बेहद जरूरी हैं।

Whatsapp Channel Join

16 08 2019 bagval 19490976

बड़े-बड़े चिकित्सक हुए फेल

बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति नेत्रहीन था, जिसने आंखों की रोशनी वापस पाने के लिए कई जगहों पर उपचार करवाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हो पाया। परिजनों द्वारा दिल्ली के एम्स में भी दिखाया, लेकिन कोई उपचार नजर नहीं आ सका। जिसके बाद वह व्यक्ति मंदिर में पहुंचा और आंखों में वटवृक्ष से निकलने वाले दूध को डाला गया। ये माता का चमत्कार ही था कि वह मरीज ठीक हो गया। पुजारी ने बताया कि ऐसे ही कई किस्से मंदिर से जुड़े हुए हैं।

img 20230322 wa0025

सरकारी उपेक्षा का शिकार

लोगों ने इताया कि इतना बड़ा और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल होने के बावजूद यह स्थान सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं। यहां कभी किसी मंत्री ने विकास के लिए काम नहीं किया। कहते है कि ये जरूर है कि चुनावों के समय बड़े-बड़े नेता और मंत्री यहां आकर माथा टेकते है, लेकिन यहां के विकास के लिए कुछ भी नहीं करते। यहां किसी प्रकार की कोई सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं हैं।

09 10 2013 07etw01 c 2

कैसे पहुंचे मंदिर तक

यूपी की राजधानी लखनउ से यहां तक का रास्ता करीब 160 किलोमीटर का हैं। गोंडा से इसकी दूरी करीब 40 कि.मी. होगी, तो वहीं अयोध्या से इसकी दूरी करीब 36 कि.मी. होगी। मंदिर तक जाने के लिए पक्की रोड पूरी तरह से नहीं बनी हैं। यहां तक पहुंचने के लिए अपना साधन होना बेहद जरूरी हैं।

download 16