Uttarkashi Tunnel Rescue Update : उत्तरकाशी के सिल्क्यारा टनल में फंसी 41 जिंदगियों का आखिरकार 17वें दिन सूर्योदय हो ही गया। रेस्क्यू टीम ने करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सभी मजदूरों को सकुशल बाहर निकाला। मजदूरों को टनल से बाहर लाकर तुरंत एंबुलेस से अस्पताल पहुंचाया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता के बाद सभी मजदूरों के परिजनों, रेस्क्यू टीम और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाहर निकाले गए मजदूरों से बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना। उनके केंद्रीय मंत्री वीके सिंह भी मौजूद रहे।
बता दें कि 12 नवंबर 2023 दिवाली का वह दिन उत्तराखंड के इतिहास में कभी न भुलाने वाला वो दिन है, जब एक ओर पूरा देश दिवाली की खुशियों में मग्न था और उत्तरकाशी के सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल में काम कर रहे 41 मजदूर अंधेरी सुरंग में कैदी बन गए। उत्तरकाशी की का एक हिस्सा अचानक ढह गया और सभी मजदूर बाहरी दुनिया से कट गए। रेस्क्यू कंपनियों ने अंदर फंसे मजदूरों को बचाने के लिए कवायद शुरू की। फिर एक के बाद एक टीम के 6 प्लान फेल हुए, लेकिन मजदूरों की जिंदगी बचाने के लिए कभी सुंदर के अंदर तो कभी ऊपर से खुदाई कर उनके जीवन को बचाने का प्रयास जारी रहा। मंगलवार को 17 दिन बाद रात करीब 8:35 बजे सभी को मजदूरों को एक-एक करके बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद सभी को एम्बुलेंस से इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया।

बताया जा रहा है कि ड्रिलिंग मशीन के जरिए मलबा हटाते हुए इन मजदूरों को टनल से बाहर निकाला गया। जिसमें 800 एमएम के पाइप डाले गए। इन पाइपों के जरिए एक-एक कर मजदूरों को बाहर निकाला गया। मजदूर रेंगते हुए बाहर निकाले गए। इनमें से जो मजदूर कमजोर थे, उन्हें एक स्ट्रेचर बनाकर पहिए के जरिये बाहर निकाला गया। इन मजदूरों को स्ट्रेचर पर लिटाकर रस्सी के जरिये बाहर खींचा गया।

रेस्क्यू के तहत शाम 7:05 बजे सबसे पहले झारखंड निवासी विजय होरो को बाहर लाया गया। दूसरे मजदूर गणपति होरो को भी टनल से बाहर निकाला गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने बाहर निकाले गए श्रमिकों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत करते हुए उनसे बातचीत की। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सभी मजदूरों को उत्तराखंड सरकार की ओर से कल एक-एक लाख रुपये की मदद दी जाएगी। उन्हें एक महीने का सवेतन अवकाश भी दिया जाएगा। जिससे वह अपने परिवार वालों से मुलाकात कर सकें।

इन मजदूरों को टनल से निकाला गया बाहर
उत्तरकाशी के सिल्क्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को सकुशल बाहर निकाला गया है। इन मजदूरों में विजय होरो, गणपति होरो, मनजीत, अनिल, धीरेंद्र नायक, उनाधर नायक, तपन मंडल, राम प्रसाद, चंपा उराव, जयप्रकाश, सुखराम रंजीत लोहार, महादेव नायक, जयदेव वैरा, सोखिम मन्ना, संजय, राजेंद्र, रामसुंदर, सुबोध कुमार वर्मा, विश्वजीत वर्मा, समीर नायक, रविंद्र नायक, राम मिलन, संतोष कुमार, अंकित कुमार, सतदेव, सोनू शाह, दीपक कुमार, मानिक, अखिलेश, गब्बर सिंह नेगी, अहमद, सुशील शर्मा, वीरेंद्र, भगतू और रिंकू को बाहर निकाल गया है।

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री से ली रेस्क्यू ऑपरेशन की अपडेट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में अपडेट ली। उन्होंने कहा कि अंदर फंसे श्रमिकों के परिवारों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंदर फंसे श्रमिकों की सुरक्षा के साथ बाहर राहत कार्य में लगे लोगों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

मजदूरों के लिए पहले से तैयार था अस्थाई अस्पताल और हैलीकॉप्टर
प्रशासन की ओर से मजदूरों को टनल से बाहर निकलवाने के लिए सभी तैयारियां पूरी की गई थी। एक दिन पहले ही टनल के पास 41 एंबुलेस और डॉक्टरों की टीम को तैनात किया गया था। अंदर फंसे मजदूरों को टनल से बाहर लाते ही प्राथमिक परीक्षण के लिए बाहर बनाए गए अस्थायी अस्पताल में ले जाया गया। साथ ही यहां एक हैलीकॉप्टर भी तैनात गया था, ताकि किसी को अगर जरुरत हो तो उसे तत्काल बड़े अस्पताल ले जाया जा सके।

इसके अलावा श्रमिकों की उचित देखभाल के लिए चिन्यालीसौड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 41 बिस्तरों का एक अस्पताल तैयार किया गया है। मजदूरों को टनल से बाहर निकलाते ही वहां पहुंचाया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर पूरे देश और दुनिया की नजर बनी हुई थी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह स्वयं इस ऑपरेशन पर नजर रखे हुए थे।

कब-कब बंधी थी मजदूरों को बाहर निकालने की उम्मीदें
– 14 नवंबर को टनल में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए टनल के भीतर ड्रिल शुरू की गई। इस दौरान मलबे की बाधा सामने आई, लेकिन अभियान ने उम्मीद बंधाए रखी।
– 16 नवंबर को पहली मशीन के नाकाम होने के बाद दूसरी अमेरिकन ऑगर मशीन से ड्रिल का कार्य शुरू किया गया। यह ड्रिल 18 मीटर तक पहुंची तो एक बार फिर उम्मीद बढ़ने लगी।
– 20 नवंबर को टनल के भीतर सफलतापूर्वक 6 इंच का पाइप पहुंचा तो 900 मिमी पाइप के पहुंचने की उम्मीद के बढ़ने की आस जगी।
– 21 नवंबर को मशीन के भीतर टेलिस्कोपिक कैमरा पहुंचाया गया। जिसकी मदद से मजदूरों को देखकर उनका कुशलक्षेम जाना गया। फिर अभियान में और तेजी आई। 900 मिमी पाइप 22 मीटर पर अटकने के बाद 800 मिमी पाइप उसके अंदर से भेजने का कार्य शुरू किया गया।