Gurugram से भाजपा सांसद और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह(MP Rao Inderjit Singh) ने रेवाड़ी(Rewari) में एक सम्मान समारोह के दौरान अपनी पार्टी पर सवाल उठाए(raised questions on his party)। उन्होंने कहा कि पार्टियां अपना हित देखती हैं और हमें भी यह देखना होगा कि हमारी पार्टी हमारी बात सुन रही है या नहीं। अगर सुन रही है तो बहुत अच्छा, लेकिन अगर नहीं सुन रही है, तो इसका कारण समझना होगा। उन्होंने जनता से कहा कि मैं अपने लोगों की राय लेने के लिए आया(opinion he sought from the public) हूं।
राव इंद्रजीत ने यह बात रेवाड़ी के कोसली कस्बा में आयोजित एक सम्मान समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि राजनीति में जब तक ऐसी बातें नहीं उठेंगी, तब तक स्थिति नहीं सुधरेगी। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी में हमें दब्बू प्रवृत्ति के नेता नहीं चाहिएं। हमें ऐसे नेता चाहिए जो अपनी आवाज बुलंद कर सकें। राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि वे यहां कुछ मांगने नहीं आए हैं, बल्कि सलाह मशविरा करने और लोगों के साथ बांडिंग बनाने आए हैं। उन्होंने कहा, “मैं आपका प्रतिनिधि नहीं हूं, न मैंने यहां से चुनाव लड़ा और न ही वोट मांगे। लेकिन, मैं आपका साथी जरूर हूं।

राव इंद्रजीत सिंह ने परिसीमन के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि सरकारों ने उनके साथ नाइंसाफी की है। उन्होंने गुरुग्राम लोकसभा के दो हलकों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के दो हलके पिछले 50 साल से रिजर्व हैं, जिनमें एक बावल और दूसरा पटौदी शामिल है। जबकि भिवानी- महेंद्रगढ़ में एक भी हलका रिज़र्व नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि फिर हमारे साथ ही नाइंसाफी क्यों होती है। उन्होंने कहा, “हमने अपने हलके खोए हैं। सरकारों ने हमें बांट कर रख दिया है।”
‘संगठित रहो और अपनी आवाज उठाओ’
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि लोग बोलते हैं कि इंद्रजीत लड़-झगड़ लेता है, लेकिन अगर वे नहीं बोलेंगे तो उनकी कौन सुनेगा। इसलिए उन्होंने लोगों से संगठित रहने और अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दक्षिण हरियाणा के हर वोट और हर इंसान की जरूरत है।

कोसली-भाकली नामकरण विवाद
कोसली-भाकली नामकरण विवाद पर बोलते हुए राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि कोसली और भाकली के लोगों से हाथ जोड़कर विनती है कि वे यह लड़ाई बंद कर दें। उन्होंने सलाह दी कि दोनों गांवों से पांच-पांच मेंबर दे दें, जिनमें महिलाएं भी हों और ग्यारह आदमी वे खुद देंगे, और बैठकर एक कमेटी बना लें। विधानसभा चुनाव से पहले नामकरण मामले को सुलझाने की बात कही।