Ganesh Chaturthi

आखिर किसने की थी Ganesh Chaturthi की शुरूआत, पढ़िए पूरी कथा

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Ganesh Chaturthi एक प्रमुख हिंदु त्यौहार है। यह त्यौहार हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान भक्त गणेश जी की सजावटी मूर्तियां अपने घरों में और सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित करते हैं।

इसके अलावा गणेश जी की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही विभिन्न तरह के भोग लगाएं जाते है। यह पर्व 10 दिन तक चलता है और अनंत चतुर्थी के दिन गणेश जी की प्रतिमा को बड़े ही धूमधाम के साथ विसर्जन किया जाता है। इस उत्सव का उद्देश्य नई शुरूआत की कामना करना होता है।

गणेश चतुर्थी कथा

गणेश चतुर्थी की शुरुआत महाराष्ट्र की राजधानी पुणे से हुई थी। गणेश चतुर्थी का इतिहास मराठा साम्राज्य के सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भारत में मुगल शासन के दौरान अपनी सनातन संस्कृति को बचाने हेतु छत्रपति शिवाजी ने अपनी माता जीजाबाई के साथ मिलकर गणेश चतुर्थी यानी गणेश महोत्सव की शुरुआत की थी।

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छत्रपति शिवाजी द्वारा इस महोत्सव की शुरुआत करने के बाद मराठा साम्राज्य के बाकी पेशवा भी गणेश महोत्सव मनाने लगे। गणेश चतुर्थी के दौरान मराठा पेशवा ब्राह्मणों को भोजन कराते थे और साथ ही दान पुण्य भी करते थे। पेशवाओं के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में हिंदुओं के सभी पर्वों पर रोक लगा दी लेकिन फिर भी बाल गंगाधर तिलक ने गणेश चतुर्थी के महोत्सव को दोबारा मनाने की शुरूआत की। इसके बाद 1892 में भाऊ साहब जावले द्वारा पहली गणेश मूर्ति की स्थापना की गई थी।

10 दिनों तक क्यों मनाया जाता है गणेश उत्सव

10 दिनों तक गणेश उत्सव मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब वेद-व्यास जी ने गणेश भगवान से महाभारत ग्रंथ लिखने की प्रार्थना की थी, तब गणेश जी ने 10 दिनों तक बिना रुके महाभारत लिखी थी। इन दस दिनों में गणेश जी पर धूल मिट्‌टी की परत जम गई। 10 दिन के बाद यानी की अनंत चतुर्दशी पर बप्पा ने सरस्वती नदी में स्नान कर खुद को स्वच्छ किया, उसके बाद से ही दस दिन तक गणेश उत्सव मनाने के बाद विधि-विधान से उनका विसर्जिन कर दिया जाता है।

इस दिन मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी

इस साल गणेश चतुर्थी 7 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन से 10 दिवसीय गणेश उत्सव शुरू हो रहा है और इसका समापन अनंत चतुर्दशी पर 17 सितंबर को होगा। इस दिन बप्पा की मूर्ति का विसर्जन कर उन्हें विदाई दी जाती है।

गणेश चतुर्थी स्थापना मुहूर्त

पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर 2024 को दोपहर 03 बजकर 01 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 7 सितंबर 2024 को शाम 05 बजकर 37 मिनट पर इसका समापन होगा।

गणेश जी की स्थापना विधि

सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध करें और वहां पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद भगवान गणेश जी को वहां स्थापित कीजिए। गणेश जी की मूर्ति के दोनों और रिद्धि-सिद्धि के रूप में एक-एक सुपारी रखें। भगवान गणेश जी के दाई और जल से भरा कलश रखें और उनके सामने घी से भरा दीपक भी जलाएं। इसके बाद हाथों में फूल, मिठाई लेकर गणेश जी को अर्पित करें और उनकी आरती उतारें।

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