Pakistan : कटसराज मंदिर(Katsraj Temple) पाकिस्तान के चकवाल गांव में स्थित है, जो भगवान शिव(Lord Shiva) के लिए एक प्रमुख स्थल है। यह मंदिर पाकिस्तान(Pakistan) के चकवाल गांव से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर के इतिहास और मान्यताओं के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी है।
बता दें कि इस मंदिर के संबंध में भगवान शिव और उनकी पत्नी सती के पिता दक्ष के घर में घटी एक कथा है। सती के पिता के यज्ञ में जब उनका अपमान हुआ, तो सती ने आत्मदाह कर दिया। इसके बाद भगवान शिव ने अपने दुख के कारण तांडव नृत्य किया और उनके आंसू गिरे, जिनसे दो कुंड बने। एक कुंड को कटाक्ष कुंड कहा जाता है, जो पाकिस्तान में है और दूसरा कुंड पुष्कर तीर्थ में है, जो भारत में स्थित है।

मान्यता है कि इस मंदिर के स्थापना का काम महाभारत काल में पांडवों ने किया था। पांडव अपने वनवास के दौरान यहाँ रहे थे और सात मंदिर निर्मित किए थे, जो अब सात मंदिर के रूप में जाने जाते हैं। इस स्थान पर एक मान्यता यह भी है कि यहां युधिष्ठिर और यक्ष के बीच संवाद हुआ था। कटसराज मंदिर का नाम कटाक्ष कुंड से आया है, जो कि भगवान शिव के आंसुओं से बना है।
हिंदू धर्म की आस्था का केंद्र
यहां तक कि आज भी कई लोग मानते हैं कि यह मंदिर पाकिस्तान में हिंदू धर्म की आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। महाशिवरात्रि के दिन यहां लोगों की भीड़ बहुत अधिक होती है, जो इसे धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है। वहीं श्रद्धालु सोमवान के दिन भी भगवान शिव के दर्शन करने के लिए पहुंचते है और कुंड के जल का छिड़काव कर भगवान शिव की आराधना करते हैं।
40 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद
चकवाल जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव अपनी पत्नी सती के साथ यहीं रहते थे। सती की मृत्यु के बाद उनकी याद में तांडव करते भगवान शिव के आंसू यहां गिरे थे। कहा जाता है कि दुखी शिव इतना रोए कि उनके आंसुओं से यहां तालाब बन गया।
सतग्रह क्या कहते हैं
कटासराज मंदिर को सतग्रह भी कहा जाता है, क्योंकि वहां सात पुराने मंदिरों का एक समूह हैं। इसके अलावा वहां एक बौद्ध स्तूप के अवशेष, एक जोड़ा मध्यकालीन अभ्यारण्य, कुछ हवेलियां भी है, जो हिंदुओं द्वारा पवित्र मानी जाने वाली झील के चारों ओर फैले हुए हैं।
कटसराज मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
1872-73 सीई में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले महानिदेशक एलन कनिंघम के अनुसार ज्वाला मुखी के बाद हिंदुओं के लिए कटासराज पंजाब में दूसरा सबसे बड़ा पवित्र स्थान माना गया हैं। ऐसा माना जाता हैं कि पांडवों ने कटास और सतग्रह के अभ्यारण्यों में ही अपने वनवास के 12 महत्वपूर्ण साल बिताए थे।