गुरु पूर्णिमा पर समालखा में संत मनदीप दास महाराज का भव्य स्वागत, बोले – इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म
➤ समालखा की कमल कुटिया में संत मनदीप दास महाराज का पुष्प वर्षा से स्वागत
➤ गुरु रविदास जी, संत कबीर और गुरु नानक के उपदेशों को अपनाने का आह्वान
➤ श्रद्धालुओं ने भजनों पर झूमकर मनाया संत घीसा महाराज प्रकट दिवस
समालखा की कमल कुटिया रविवार को गुरु भक्ति और श्रद्धा का केंद्र बन गई, जब रविदासिया धर्म के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डेरा सिरसगढ़ गद्दीनशीन संत मनदीप दास महाराज ने वहां गुरु पूर्णिमा और संत घीसा महाराज प्रकट दिवस के अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
महंत सुंदर दास के आमंत्रण पर पहुंचे संत मनदीप दास का फूल मालाओं और पुष्प वर्षा से जोरदार स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने उनकी वाणी और प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और भजनों पर झूमते नजर आए। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं” और संत रविदास, कबीर और नानक जैसे महापुरुषों की शिक्षाओं को जीवन में उतारने की आवश्यकता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गुरु रविदास जी की वाणी भेदभाव मिटाकर प्रेम और एकता का मार्ग दिखाती है। सतगुरु के नाम के नशे को अपनाने और बाहरी नशों से दूर रहने की सीख देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा जीवन ही भवसागर से पार करा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान मनदीप दास महाराज को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया और श्रद्धालुओं के लिए अटूट लंगर भी वितरित किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक पूनम राजा रानी, पूर्व सरपंच मामन छाछिया, डॉ. अमित पोरिया, सरपंच कृष्ण हाथवाला, रणधीर चौहान, मोहन लाल, बलदेव, रतन लाल, साहब सिंह रंगा, रोहतास डाबड़ा, सुरेंद्र करहंस, सोहन लाल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इससे पहले संत मनदीप दास महाराज ने रविदास समाज कल्याण सभा द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में भी भाग लिया, जिसमें सभा के प्रधान मास्टर राजेन्द्र सिंह, रामकिशन बडगुजर, राजेश दहिया, दिलबाग सिंह, शीला देवी समेत समाज के अनेक सदस्य मौजूद रहे।