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दिल्ली सरकार बनाएगी बवाना से इंद्रलोक तक एलिवेटेड रोड, हरियाणा से मांगी NOC

हरियाणा

दिल्ली सरकार अब हरियाणा को दिल्ली से जोड़ने के लिए एक बड़ा बुनियादी ढांचा परियोजना शुरू करने जा रही है। बवाना से इंद्रलोक तक लगभग 20 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। यह रोड दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा शर्मा की पहल पर बनाई जाएगी, और इसके निर्माण का कार्य नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 3000 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसे दिल्ली सरकार स्वयं वहन करेगी।

इस एलिवेटेड रोड को बनाने से न केवल दिल्ली के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों को फायदा होगा, बल्कि हरियाणा खासकर सोनीपत जिले के लोगों को भी सीधा लाभ मिलेगा। इस रोड के बन जाने के बाद हरियाणा के लोग सीधे दिल्ली के इंद्रलोक जैसे प्रमुख इलाके में पहुंच सकेंगे, जो करोल बाग, कनाट प्लेस और आईएसबीटी जैसे मुख्य क्षेत्रों से बेहद नजदीक है। इस प्रोजेक्ट से दो लोकसभा और 18 विधानसभा क्षेत्रों को सीधा फायदा मिलेगा।

दिल्ली सरकार ने इस परियोजना के लिए हरियाणा सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मांगा है ताकि इस एलिवेटेड रोड का कुछ हिस्सा हरियाणा सीमा से होकर गुजर सके। बवाना दिल्ली का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है और हरियाणा बॉर्डर से सटा हुआ है। यहां से प्रतिदिन हजारों वाहन आते-जाते हैं, जिससे जगह-जगह ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाएं आम बात हैं। इस रोड के निर्माण से इस समस्या का स्थायी समाधान मिल सकेगा।

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राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर पश्चिमी यमुना नहर पर स्थित रोड की स्थिति अत्यंत खराब है। यह रोड काफी संकरी है और हर साल यहां कई दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कई वाहन नहर में गिर जाते हैं। दिल्ली सरकार को इस कैनाल रोड के चौड़ीकरण और सुरक्षा इंतजाम को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। अब जाकर इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री रेखा शर्मा ने एलिवेटेड रोड निर्माण का फैसला किया है।

क्या है एलिवेटेड रोड:
एलिवेटेड रोड यानी एक ऊंचा मार्ग जो ज़मीन से ऊपर पुलों या ढांचों पर बनाया जाता है, ताकि ट्रैफिक को सतह पर बने मार्गों से हटाकर ऊपर से गुजरने का विकल्प दिया जा सके। इससे नीचे के इलाकों में जाम कम होता है और सफर का समय घटता है।

इस हाईटेक एलिवेटेड रोड के बन जाने से न सिर्फ यातायात सुगम होगा बल्कि रोजाना सफर करने वाले हज़ारों लोगों की जान भी सुरक्षित रहेगी। एक्सीडेंट कम होंगे, और दिल्ली-हरियाणा की औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।