➤ पाइल्स के दर्द से खानपान सुधार कर पाया जा सकता है छुटकारा
➤ समय पर इलाज न होने पर हो सकते हैं गंभीर परिणाम, बढ़ सकती है सर्जरी की नौबत
➤ डॉ. अशोक चौहान व डॉ. आचार्य अंकित के टिप्स: कमल आयुर्वेदिक क्लीनिक दे रहा बिना ऑपरेशन राहत की संजीवनी विशेषज्ञ राय में संपूर्ण मार्गदर्शन….
पाइल्स (बवासीर) एक ऐसी बीमारी है, जिसे बहुत से लोग शर्म या डर के कारण छिपाते रहते हैं। मगर सच्चाई ये है कि समय रहते इलाज और सही खानपान अपनाकर इस बीमारी को काबू में लाया जा सकता है। कमल आयुर्वेदिक क्लीनिक के डॉ. अशोक चौहान और आचार्य अंकित जो वर्षों का अनुभव रखते हैं, का मानना है कि यदि खानपान, जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए, तो पाइल्स जैसी जटिल बीमारी से भी बिना ऑपरेशन छुटकारा पाया जा सकता है।

ऐसे में आधुनिक भागदौड़ भरे जीवन में जब लोग पाइल्स जैसी समस्याओं से जूझते हैं और ऑपरेशन की डरावनी राह पर मजबूर हो जाते हैं, तब एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आती है — डॉ. अशोक चौहान और डॉ. आचार्य अंकित के अनुभवी हाथों से चल रहे आयुर्वेदिक क्लीनिक की। वर्षों के अनुभव और हजारों सफल केस के साथ, यह क्लीनिक न केवल इलाज करती है, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली को संतुलन में लाकर संपूर्ण स्वास्थ्य की ओर ले जाती है।
यहां न कोई चीर-फाड़, न कोई हॉस्पिटल में लंबा भर्ती, सिर्फ भारतीय परंपरा की शुद्ध जड़ी-बूटियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार की गई आयुर्वेदिक थेरेपी। हजारों मरीजों ने यहां से सर्जरी टाल कर स्वस्थ जीवन पाया है, और आज यह क्लीनिक हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-NCR और राजस्थान के मरीजों के बीच भरोसे का नाम बन चुकी है।
“क्योंकि हमारा उद्देश्य सिर्फ बीमारी को रोकना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाना है।”
पाइल्स हो या कोई पुरानी गुदा रोग की समस्या – आयुर्वेदिक समाधान अब आपके दरवाज़े पर।
पाइल्स क्या है और कैसे होती है?
पाइल्स यानी बवासीर एक ऐसी स्थिति है जिसमें मलद्वार (Anus) के पास की रक्तवाहिकाएं सूज जाती हैं और उनमें दर्द, जलन और कभी-कभी रक्तस्राव होने लगता है। यह समस्या आमतौर पर कब्ज, खराब पाचन, अधिक मिर्च-मसाले के सेवन और तनाव के कारण होती है। आधुनिक जीवनशैली और भागदौड़ में लोग अनियमित भोजन, कम पानी और तले-भुने खाने की आदतों के शिकार हो जाते हैं जिससे यह बीमारी उभरती है।
आयुर्वेद क्या कहता है? — विशेषज्ञों की दृष्टि

आचार्य अंकित के अनुसार, आयुर्वेद में पाइल्स को ‘अर्श’ कहा गया है, और यह तीन प्रकार की दोषवृत्तियों (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन से उत्पन्न होता है। उनका कहना है कि यदि इन दोषों को संतुलित कर दिया जाए तो बिना सर्जरी के भी रोगी स्वस्थ हो सकता है।
वहीं, डॉ. अशोक चौहान बताते हैं कि उनके विशेष आयुर्वेदिक नुस्खों, जैसे कि त्रिफला चूर्ण, अर्जुन छाल, और गंधक रसायन, से मरीजों को तेजी से राहत मिली है। कई ऐसे मरीज हैं जिनकी सर्जरी निर्धारित थी, लेकिन मात्र आयुर्वेदिक चिकित्सा से वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए।
खानपान में करें ये सुधार — और राहत पाएं बिना ऑपरेशन
डॉ. अंकित और डॉ. चौहान द्वारा सुझाए गए डेली रुटीन और खानपान टिप्स:
रोजाना 3-4 लीटर पानी पिएं – शरीर की गंदगी बाहर निकालने में सहायक
फाइबर युक्त भोजन – जैसे पकी हुई दलिया, चोकर वाली रोटी, सलाद, फल
मसालेदार और तला-भुना भोजन टालें – यह मल त्याग को कठिन बनाता है
कब्ज से बचाव करें – रात में त्रिफला चूर्ण या ईसबगोल लेना फायदेमंद
अभ्यास और योग – 'मूलबंध', 'पवनमुक्तासन' जैसे आसन पाचन सुधारते हैं
ऑपरेशन कब ज़रूरी होता है?

डॉ. अशोक चौहान कहते हैं कि पाइल्स के प्रारंभिक चरण में यदि इलाज शुरू कर दिया जाए तो सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन जब स्थिति तीसरे या चौथे स्तर तक पहुंच जाती है, जब रोगी को अत्यधिक दर्द, असहनीय जलन, अत्यधिक रक्तस्राव और थक्के बनने लगते हैं, तब सर्जरी (Hemorrhoidectomy या Laser Piles Surgery) अंतिम विकल्प बन जाता है।
परंतु वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि उनकी क्लिनिक में 70% ऐसे मरीज भी पूरी तरह ठीक हुए हैं, जिनकी सर्जरी डेट तय हो चुकी थी, लेकिन आयुर्वेदिक उपचार से अब वे सामान्य जीवन जी रहे हैं।

“जहां Allopathy सर्जरी की बात करती है, वहां हम बिना चीर-फाड़ उपचार करते हैं” — यह कहना है डॉ. आचार्य अंकित का, जिनकी panipat, Hisar, Mujaffarnagar व अन्य स्थानों पर स्थित आयुर्वेदिक क्लीनिक अब तक हजारों पाइल्स मरीजों को राहत दे चुकी है।

संयुक्त रूप से इन दोनों विशेषज्ञों की क्लीनिक में उपलब्ध सेवाएं:
पाइल्स, फिशर और फिस्टुला का आयुर्वेदिक इलाज
100% हर्बल दवाएं, कोई साइड इफेक्ट नहीं
मरीज की स्थिति के अनुसार डाइट चार्ट और लाइफस्टाइल कोचिंग
पोस्ट-थेरेपी फ़ॉलो-अप और रिकवरी ट्रैकिंग
घरेलू जड़ी-बूटियों से उपचार – बिना हॉस्पिटल एडमिशन

डॉ. चौहान और डॉ. अंकित आचार्य की टीम आज हरियाणा के साथ-साथ पंजाब, राजस्थान और दिल्ली NCR से भी मरीजों को नियमित सेवा दे रही है। मरीजों की संतुष्टि दर 90% से अधिक है, और सबसे बड़ी बात – ‘सर्जरी से बचना’ ही यहां की प्राथमिकता है।
पाइल्स के मरीजों के लिए जरूरी सलाह:
किसी भी हालत में पाइल्स को नजरअंदाज न करें
खुद दवाइयों का सेवन करने की बजाय विशेषज्ञ से मिलें
समय पर इलाज ही सर्जरी से बचा सकता है
आयुर्वेद में समाधान है – बस धैर्य और अनुशासन की ज़रूरत है

