weather 16 2

गैंगस्टर लॉरेंस इंटरव्यू केस: हाईकोर्ट ने कहा, जूनियर अफसरों को बलि का बकरा न बनाएं

पंजाब
  • गैंगस्टर लॉरेंस के इंटरव्यू मामले में बर्खास्त डीएसपी गुरशेर सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा: जूनियर अधिकारी बलि का बकरा न बनें।
  • SIT जांच में इंटरव्यू पंजाब की खरड़ CIA बिल्डिंग में रिकॉर्ड होने की पुष्टि; पहले पुलिस करती रही थी इनकार।
  • मामले में अब तक 7 पुलिसकर्मी निलंबित, 1 डीएसपी बर्खास्त; जेलों में AI CCTV समेत सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश।

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के वायरल टीवी इंटरव्यू मामले में बर्खास्त डीएसपी गुरशेर सिंह की याचिका पर आज पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। गुरशेर सिंह के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि इंटरव्यू के समय लॉरेंस की हिरासत पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के पास थी और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भी विभिन्न अधिकारियों के पास थी। ऐसे में डीएसपी गुरशेर की भूमिका साबित नहीं होती और उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है।

image 23

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी जूनियर अधिकारी को बलि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 31 जुलाई तय की है।

पंजाब पुलिस करती रही थी इनकार, SIT ने खोली परतें
मामले की शुरुआत में पंजाब पुलिस ने दावा किया था कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू राज्य की सीमा में नहीं हुआ। लेकिन SIT की जांच में सामने आया कि पहला इंटरव्यू 3-4 सितंबर 2022 की रात खरड़ स्थित CIA बिल्डिंग में रिकॉर्ड हुआ था। वहीं दूसरा इंटरव्यू राजस्थान में रिकॉर्ड हुआ, जिसके चलते उस हिस्से की FIR राजस्थान पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई है।

Whatsapp Channel Join

गैंगस्टर लॉरेंस ने इन इंटरव्यू में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में शामिल न होने की बात कही थी और अभिनेता सलमान खान को जान से मारने की धमकी दोहराई थी। इन बयानों के सार्वजनिक होने के बाद देशभर में हड़कंप मच गया।

पुलिस महकमे में कार्रवाई और सुधार
मामले की जांच के बाद पंजाब सरकार ने 2 डीएसपी सहित 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया और डीएसपी गुरशेर सिंह को सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया गया। अदालत को इसकी जानकारी दी जा चुकी है। इस घटना के बाद जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार ने विशेष ध्यान देना शुरू किया है।

जेलों में हाईटेक निगरानी सिस्टम
कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने जेलों में तकनीकी निगरानी को प्राथमिकता दी है। अब तक 8 जेलों में AI आधारित CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा, X-ray बैगेज स्कैनर, बॉडी वर्न कैमरे भी लगाए जा रहे हैं, जिससे कैदियों की गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जा सके।

यह मामला न केवल पंजाब पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि राज्य की जेल व्यवस्था की खामियों को भी उजागर करता है। अदालत की कड़ी निगरानी और सख्त रुख से अब अधिकारियों पर सीधी जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ रहा है।