पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जो फ्लैट पहले 40 लाख में मिलते थे, अब वही प्रॉपर्टी 1 करोड़ से ऊपर पहुंच गई है। लेकिन इस बढ़ती कीमत का सीधा असर अब मकानों की बिक्री पर दिखाई दे रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर में आई इस सुस्ती को प्रॉपटाइगर की ताजा रिपोर्ट ने भी रेखांकित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में देश के 8 प्रमुख आवासीय बाजारों में घरों की बिक्री 14% घटकर 97,674 यूनिट रह गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 1,13,768 यूनिट थी।
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) और पुणे, दो सबसे बड़े प्रॉपर्टी मार्केट्स, यहां बिक्री में 30% की गिरावट आई है। पिछले साल इन दो शहरों में 60,191 घर बिके थे, जबकि इस बार सिर्फ 41,901।
दिल्ली-एनसीआर में भी यह गिरावट 9% तक रही। वहीं, पुणे में 27% और हैदराबाद में 6% की गिरावट दर्ज की गई।
प्रॉपटाइगर के श्रीधर श्रीनिवासन ने बताया कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए प्रॉपर्टी की सामर्थ्य (affordability) सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। आम खरीदारों की धारणा कमजोर हुई है, और निवेशकों ने भी इस सेक्टर से कदम पीछे खींचे हैं। परिणामस्वरूप, रियल एस्टेट निवेश में 37% की गिरावट देखी गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नई प्रोजेक्ट लॉन्चिंग में भी तिमाही-दर-तिमाही और साल-दर-साल दोनों ही आधार पर गिरावट आई है। खासतौर पर MMR, पुणे और अहमदाबाद में नई सप्लाई में कमी देखी गई। रिपोर्ट में जिक्र है कि भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव ने भी मार्केट पर नकारात्मक असर डाला है।
अभी की परिस्थिति में रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती है – बजट में घर उपलब्ध कराना और लोगों के विश्वास को दोबारा जीतना।

