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पूर्व प्रधानमंत्री का पोते प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद की सजा

देश

पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद
पीड़िता से बार-बार दुष्कर्म, वीडियो से ब्लैकमेलिंग का भी आरोप
50 से ज्यादा महिलाओं के यौन शोषण के 3000 वीडियो पाए गए


पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते और कर्नाटक के हासन से पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु की विशेष अदालत ने बलात्कार के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें से 7 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। यह मामला रेवन्ना पर दर्ज कुल चार गंभीर यौन शोषण के मामलों में पहला केस है, जिसमें उन्हें सजा सुनाई गई है।

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वह उनके फार्महाउस में काम करती थी और 2021 से आरोपी उसके साथ कई बार जबरन संबंध बनाता रहा। विरोध करने पर उसे धमकाया गया कि यदि उसने कुछ कहा तो उसके अश्लील वीडियो सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। कोर्ट ने पीड़िता की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों को मान्य मानते हुए रेवन्ना को दोषी ठहराया।

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इस पूरे मामले की जांच SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने की। SIT की चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे हुए कि प्रज्वल रेवन्ना ने 50 से अधिक महिलाओं के साथ जबरन या धोखे से शारीरिक संबंध बनाए, जिनमें से कई के अश्लील वीडियो उनके कब्जे से बरामद हुए। यह वीडियो 2024 में उस समय चर्चा में आए जब बेंगलुरु की सड़कों पर कुछ लोग पेनड्राइव फेंकते हुए कैमरे में रिकॉर्ड हुए और उसमें रेवन्ना के कृत्य सामने आए।

प्रज्वल रेवन्ना ने इन आरोपों के सामने आने के बाद देश छोड़कर जर्मनी भागने की कोशिश की थी, लेकिन बेंगलुरु एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जांच के दौरान SIT को लगभग 3000 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो मिले, जिनमें अधिकतर मामलों में महिलाएं पहचानने योग्य थीं और उनकी सहमति नहीं थी।

JDS (जनता दल सेक्युलर) ने इन आरोपों के बाद प्रज्वल को पार्टी से निलंबित कर दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने भी इस मामले में प्रज्वल से सार्वजनिक दूरी बना ली और कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वह भारत नहीं लौटे तो उन्हें परिवार से निष्कासित कर दिया जाएगा।

पीड़िता ने अपना बयान दर्ज करवाते हुए बताया था कि उसे लगातार वीडियो वायरल करने की धमकी देकर यौन शोषण का शिकार बनाया गया। रेवन्ना ने अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए सजा कम करने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर उम्रकैद की सजा सुनाई।

यह फैसला न केवल पीड़ित महिला के लिए न्याय की दिशा में एक बड़ी जीत है, बल्कि यह संदेश भी है कि राजनीति, पावर और परिवार चाहे जितना भी बड़ा हो, अगर कानून का उल्लंघन करते हैं तो सजा तय है।