➤ हरियाणा में कांग्रेस की हार के पीछे वोटर लिस्ट गड़बड़ी को बताया कारण
➤ राहुल गांधी बोले- हरियाणा में भी फर्जी वोटिंग, आयोग से डेटा नहीं मिला
➤ एक ही पते पर दर्जनों वोट, डुप्लीकेट वोटरों से नतीजे प्रभावित हुए
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने उन्होंने हरियाणा का भी जिक्र किया। उन्होंने हरियाणा में हार के लिए वोटर लिस्ट को जिम्मेदार बताया। कहा कि ये गड़बड़ियां इसलिए हैं क्योंकि चुनाव आयोग वोटर्स का डेटा उपलब्ध नहीं कराता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वजह से वोटों की चोरी हो रही है। कहा कि , कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में वोटर लिस्ट में भारी हेरफेर और फर्जीवाड़ा हुआ है, जिससे चुनावी नतीजों पर सीधा असर पड़ा। खासकर हरियाणा में कांग्रेस की हार को राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों और फर्जी वोटिंग से जोड़ते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग ने मशीन-रीडेबल वोटर डेटा देने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जानबूझकर किया गया ताकि फर्जी वोटिंग को छिपाया जा सके। उन्होंने बताया कि एक ही पते पर 46 से अधिक वोटर दर्ज हैं, कई जगह वोटरों के नाम डुप्लीकेट हैं, और कुछ जगहों पर मकानों का पता ‘शून्य’ लिखा गया है, यानी वहां कोई ठोस जानकारी ही नहीं दी गई।
राहुल ने खुलासा किया कि देशभर में कांग्रेस को चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट का इलेक्ट्रॉनिक डेटा नहीं दिया गया, जिसकी वजह से सही समय पर गड़बड़ियों को पकड़ा नहीं जा सका। उन्होंने कहा कि 11 हजार से ज्यादा ऐसे वोटर्स हैं, जिन्होंने तीन बार तक वोट डाला, जो लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में अगर फर्जी वोटों की जांच पहले हो जाती, तो चुनाव नतीजे पूरी तरह से बदल सकते थे। उन्होंने कहा कि भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग ने यह खेल रचा है, और अब कांग्रेस इसके खिलाफ पूरे देश में अभियान चलाएगी।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से दो सीधे सवाल पूछे –
क्या चुनाव आयोग वोटर लिस्ट का इलेक्ट्रॉनिक डेटा राजनीतिक दलों को देगा या नहीं?
क्या आयोग यह मानता है कि देश में बड़े पैमाने पर फर्जी वोटिंग हो रही है, और अगर हां, तो उसके लिए क्या कदम उठाए गए?
उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 40 लाख फर्जी वोटर हैं, और वोटिंग के दिन शाम पांच बजे के बाद अचानक वोटिंग प्रतिशत बढ़ जाना एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।
कर्नाटक की महादेवपुरा सीट की मिसाल देते हुए राहुल ने कहा कि वहां 1 लाख फर्जी वोट मिले, जिससे नतीजे प्रभावित हुए। यही स्थिति हरियाणा के कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखी गई है, जहां बल्क में डुप्लीकेट वोटरों को जोड़ दिया गया।
कांग्रेस अब इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और जनता के बीच ले जाने की योजना बना रही है। राहुल गांधी ने कहा कि “हम लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे, चाहे इसके लिए हमें कितनी भी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।”
➤वोटर डेटा चोरी का आरोप, राहुल गांधी ने ECI से मांगा जवाब
➤कांग्रेस ने ‘मतदाता घोटाले’ को बताया लोकतंत्र पर हमला
➤विपक्षी गठबंधन INDIA ने एकजुट होकर मुद्दा उठाया
देश की राजधानी दिल्ली में आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बड़े “मतदाता डेटा चोरी” मामले पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव आयोग (Election Commission of India) से जवाब मांगा कि आखिर देशभर में मतदाताओं का डेटा कैसे और किनके हाथों में गया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस कथित डेटा चोरी के जरिए वोटरों को प्रभावित किया जा रहा है, और यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला है। उन्होंने इसे “मतदाता घोटाला” (Voter Scam) करार दिया और दावा किया कि यह सामान्य चुनावी अनियमितता नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। राहुल ने कहा, “अगर मतदाता का डेटा चोरी होता है, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है। चुनाव आयोग को पारदर्शी तरीके से इसकी जांच करानी चाहिए और जवाब देना चाहिए।”
उन्होंने इस मुद्दे को आगामी सत्र में संसद में भी उठाने की बात कही और देशभर के विपक्षी दलों से अपील की कि वे इस मामले में एकजुट होकर आवाज़ बुलंद करें। ‘भारत’ गठबंधन (INDIA Alliance) के नेताओं ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के मूल पर हमला करार दिया।
राहुल गांधी ने साथ ही यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में यह कथित तौर पर बड़े स्तर पर हुआ है, जहां निजी एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र के जरिए मतदाता लिस्ट में छेड़छाड़ की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग इस पर चुप रहेगा या फिर लोकतंत्र को बचाने के लिए सख्त कदम उठाएगा।
अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस गंभीर आरोप पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या यह मुद्दा आगामी चुनावी रणनीतियों को प्रभावित करेगा या नहीं।

