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मनीषा मर्डर केस के बीच सरकार ने भिवानी का इंटरनेट किया बंद

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➤भिवानी-दादरी में इंटरनेट बंद
➤19 से 21 अगस्त तक आदेश
➤अफवाह रोकने को कदम

हरियाणा सरकार ने भिवानी और चरखी दादरी जिलों में मोबाइल इंटरनेट, डोंगल और बल्क एसएमएस सेवाओं को 19 अगस्त सुबह 11 बजे से 21 अगस्त सुबह 11 बजे तक बंद करने का आदेश जारी किया है। यह कदम शांति-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर अफवाहें व भड़काऊ संदेश फैलने का खतरा है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसके साथ ही सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचने और शांति भंग होने की आशंका भी जताई गई है।

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हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दौरान वॉयस कॉल, व्यक्तिगत एसएमएस, बैंकिंग सेवाएं, मोबाइल रिचार्ज, ब्रॉडबैंड और लीज़लाइन इंटरनेट सेवाएं चालू रहेंगी, ताकि आम लोगों की दैनिक जरूरतों और आर्थिक गतिविधियों पर असर न पड़े।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला उस समय लिया गया है जब दोनों जिलों में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए तनाव और अफवाहों के चलते स्थिति को नियंत्रित रखना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

भिवानी में भावनाओं का उबाल, ग्रामीणों ने रोका अंतिम संस्कार, गांव की एंट्री बंद

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➤अंतिम संस्कार रोका
➤गांव ने इंसाफ की मांग की
➤ढाणी लक्ष्मण रास्ता बंद

हरियाणा के भिवानी जिले में लेडी टीचर मनीषा के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद उभर आया है। सोमवार रात प्रशासन और परिवार की मीटिंग के बाद यह उम्मीद जताई गई थी कि मंगलवार को अंतिम संस्कार होगा। लेकिन मंगलवार सुबह स्थिति बदल गई।

भिवानी के ग्रामीणों ने पंचायत बुलाकर परिवार से कहा कि मनीषा के साथ हुए अन्याय के मामले में इंसाफ मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाए। पंचायत में परिवार के पिता संजय को भी समझाया गया कि पूरा गांव उनके साथ है और किसी के दबाव में न आएं।

इसके बाद भारी संख्या में ग्रामीणों ने ढाणी लक्ष्मण की ओर जाने वाले रास्ते को रोक दिया। महिलाएं और युवा दोनों ही एंट्री पॉइंट पर इकट्ठा हो गए हैं। उनका कहना है कि बिना न्याय मिलने मनीषा का अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे। इससे गांव और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।

मनीषा हत्याकांड: फिर टला अंतिम संस्कार, मनीषा के पिता बोले प्रशासन ने दबाव डालकर सहमति ली

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➤पिता का दावा: मेरी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती, न्याय की मांग जारी
➤गांव में अंतिम संस्कार को लेकर पंचायत, ग्रामीण राजी नहीं
➤पुलिस ने सुरक्षा कड़े किए, सुसाइड नोट और प्रशासन की जांच पर विवाद

हरियाणा के भिवानी में लेडी टीचर मनीषा के अंतिम संस्कार में नई गुत्थी पैदा हो गई है। सोमवार देर रात प्रशासन की कमेटी और परिवार के साथ बैठक के बाद पिता संजय ने कहा था कि वह पुलिस जांच से संतुष्ट हैं और मंगलवार को अंतिम संस्कार करेंगे।

हालांकि, अब उनका एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें संजय कह रहे हैं कि “मेरी बेटी कभी आत्महत्या नहीं कर सकती, मुझे उस पर इतना विश्वास है। प्रशासन कह रहा है कि उसने आत्महत्या की है, मैं इसे नहीं मानता। सारी मेडिकल टीम ने यह दिखाया कि उसने आत्महत्या की है, लेकिन मैं कहता हूं कि उसने आत्महत्या नहीं की। मुझे मेरी बेटी के लिए न्याय चाहिए।”

पिता का आरोप: कमेटी और प्रशासन पर दबाव

संजय ने आगे कहा कि “प्रशासन ने कमेटी को दबाया, फिर कमेटी ने मुझ पर दबाव डाला। मैं लोगों से यही अपील करना चाहता हूं कि मेरी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए जितना भी हो सके, सहयोग करें।”

गांव में अंतिम संस्कार को लेकर पंचायत

इस बीच मनीषा के गांव ढाणी लक्ष्मण में ग्रामीण अंतिम संस्कार को लेकर पंचायत कर रहे हैं। गांव के लोग अभी तक अंतिम संस्कार के लिए राजी नहीं हैं। इससे पहले सोमवार को दादा रामकिशन ने भी कहा था कि पोती की हत्या हुई है और अगर यह आत्महत्या है तो साबित किया जाए। मनीषा की मां ने भी न्याय की मांग की थी।

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पुलिस ने सुरक्षा कड़े किए

मौहाल को देखते हुए पुलिस ने भिवानी में सुरक्षा बढ़ा दी है। मनीषा के गांव की ओर ढिगावा आते-जाते रास्तों को सील कर चेकिंग शुरू कर दी गई है।

मीटिंग और सुसाइड नोट

सोमवार देर रात प्रशासन की कमेटी और परिवार के साथ कई घंटे बैठक चली थी। बैठक के बाद दावा किया गया कि परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गया है। मीटिंग खत्म होने के बाद SDM मनोज कुमार ने कहा कि कमेटी के साथ परिवार ने भी मान लिया है कि मनीषा ने आत्महत्या की है।

मनीषा 11 अगस्त को घर से स्कूल के लिए निकली थी और कॉलेज में एडमिशन के लिए जा रही थी। वह वहां से गायब हो गई और 13 अगस्त को उसकी लाश मिली। इसके बाद परिवार ने हत्या का आरोप लगाया था। 18 अगस्त को पूरे प्रदेश में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने सुसाइड नोट भी सामने लाया, लेकिन परिवार और ग्रामीण अभी भी इस पर सवाल उठा रहे हैं।