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मुस्लिम युवक देगा संत प्रेमानंद जी को किडनी, मानवता और सौहार्द की मिसाल

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➤ मुस्लिम युवक आरिफ खान ने संत प्रेमानंद महाराज को किडनी दान करने की पेशकश की
➤ नर्मदापुरम जिले का है मामला, युवक ने खुद संपर्क कर जताई इच्छा
➤ सांप्रदायिक सौहार्द का उदाहरण बन रही यह खबर

मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले से एक अनोखा उदाहरण सामने आया है, जिसने सांप्रदायिक सौहार्द और मानवता की मिसाल पेश की है। जिले के रहने वाले आरिफ खान चिश्ती ने विख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज को अपनी किडनी दान करने की इच्छा जताई है।

आरिफ खान ने स्वयं संत प्रेमानंद जी महाराज से संपर्क कर कहा कि यदि उनकी किडनी उपयुक्त पाई जाती है तो वे इसे दान करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका कहना है कि संत प्रेमानंद जी देश और समाज के लिए लगातार सेवा कार्य कर रहे हैं और उनकी दीर्घायु समाज के लिए जरूरी है।

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युवक ने कहा कि “धर्म से बड़ा इंसानियत है, और अगर मेरी किडनी किसी की जिंदगी बचा सकती है तो मुझे खुशी होगी।” इस पहल को देखकर स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर मानवता की जीत के रूप में सराहा जा रहा है। फिलहाल डॉक्टरों की टीम मेडिकल प्रोसेस और संगतता की जांच करेगी।

मानव धैर्य, आस्था और दिव्य विश्वास की अनोखी मिसाल

मथुरा वृंदावन के विख्यात संत प्रेमानंद महाराज मानव धैर्य, आस्था और दिव्य विश्वास की अनोखी मिसाल हैं। चिकित्सीय दृष्टि से देखा जाए तो उनकी दोनों किडनियां पिछले 19 वर्षों से लगभग पूरी तरह फेल हो चुकी हैं। डॉक्टरों ने उन्हें महज ढाई से पांच साल का जीवन ही बताया था। लेकिन यह भविष्यवाणी गलत साबित हुई। आज भी संत महाराज न केवल जीवित हैं बल्कि पूरी तरह सक्रिय हैं। वे रोजाना तड़के वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और सुबह चार बजे से भक्तों के बीच सत्संग आरंभ कर देते हैं।

प्रेमानंद महाराज ने स्वयं कई बार अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें अंतिम चेतावनी दी थी। लेकिन उनका विश्वास टूटने के बजाय और दृढ़ हुआ। महाराज ने कहा – “भगवान राधारानी का आशीर्वाद और ठाकुर जी की कृपा है कि मैं आज भी जीवित हूं।” यह वही आस्था है जिसने विज्ञान की तमाम गणनाओं को चुनौती दी और मानवता के सामने अद्भुत उदाहरण पेश किया।

चिकित्सा विज्ञान की भाषा में संत प्रेमानंद महाराज ऑटोसोमल डॉमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से पीड़ित हैं। यह एक आनुवांशिक बीमारी है जिसमें किडनी का आकार असामान्य रूप से बढ़ जाता है, पानी भरने लगता है और गांठें बन जाती हैं। इसके बाद किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है। सामान्य व्यक्ति की स्थिति इस अवस्था में गंभीर हो जाती है और लंबे समय तक जीवित रहना लगभग असंभव होता है। लेकिन महाराज का चेहरा देखने पर कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता कि वे इतने खतरनाक रोग से पीड़ित हैं।

स्थानीय लोग और भक्त इसे चमत्कार मानते हैं और उनके जीवन को ईश्वरीय शक्ति से जोड़ते हैं। जहां विज्ञान असमंजस में है वहीं श्रद्धालु कहते हैं कि यह केवल भक्ति और विश्वास की जीत है।