हरियाणा में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने नेताओं को फ्री हैंड नहीं देने का निर्णय लिया है। हाईकमान ने बनाई गई चुनावी कमेटियों में बदलाव की घोषणा की है। जिसमें ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिवों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रदेश में हुड्डा के प्रभाव की बढ़त के चलते और भाजपा के 10 सालों से सत्ता में रहने के कारण हाईकमान को जीत की संभावना को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसके पीछे की बड़ी वजह में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा का प्रभाव है, जो अपने प्रभाव से हरियाणा में कांग्रेस की जड़ें गहरी हो रही है। हुड्डा ने पार्टी अध्यक्ष चौधरी उदयभान को अपने प्रभाव से लगवाया है और उसके बाद से हाईकमान द्वारा बनाई गई कमेटियों में भी उनका प्रभाव दिखा है। वहीं दूसरी ओर एसआरके ग्रुप जैसे गुटों की गुटबाजी और संदेश यात्रा के माध्यम से नेता रणदीप सुरजेवाला, कुमारी सैलजा, किरण चौधरी (एसआरके) ग्रुप द्वारा पार्टी की लाइन से अलग चलने को लेकर हो रहा है। जिस पर हाईकमान ने सीधे नजर रखी है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नेता एकजुट रहकर पार्टी के हित में काम करें। इस निर्णय के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। जिसमें तीसरा कारण जीत की संभावना को बढ़ावा देने का इरादा हैं।

नेताओं के खिलाफ लिया जा सकता है सख्त फैसला
इस फैसले के परिणामस्वरूप पार्टी हाईकमान की नेताओं पर नजर रखेगी और हर फैसले की जानकारी को आसानी से दिल्ली तक पहुंचा सकेगी। हाईकमान को यह भी महसूस होगा कि हरियाणा में गुटबाजी का माहौल है और इससे नुकसान हो सकता है, इसलिए नेताओं के खिलाफ सख्त फैसले लेने का इरादा भी है। हाईकमान की यह कोशिश रहेगी कि नेताओं में कोई गुटबाजी न हो और सभी मिलकर पार्टी के हित में काम करें।

एसआरके ग्रुप के नेताओं की संदेश यात्रा जारी
हाईकमान को यह आशा है कि पार्टी के नेता सार्वजनिक मंच पर किसी भी प्रकार की पार्टी विरोधी बयानबाजी नहीं करेंगे।हालांकि इस निर्णय के बावजूद एसआरके ग्रुप के नेता अपनी संदेश यात्रा को जारी रख रहे हैं। जिससे इस मुद्दे पर और तनाव बढ़ सकता है। इस पर हाईकमान ने बयानबाजी की ओर से कठिनाइयों की सूचना दी है, लेकिन समर्थन का इजाफा भी किया है। पार्टी चाहती है कि नेता समर्थन और साझेदारी के साथ काम करें और चुनावी परिणाम में सफलता प्राप्त करें।


