Haryana Cooperative Department scam

Haryana के सहकारिता विभाग घोटाले में CM Manohar Lal का एक्शन मोड़, अब 5 मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की होगी जांच, विपक्ष फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने को तैयार

पंचकुला बड़ी ख़बर राजनीति हरियाणा

हरियाणा में बहुचर्चित सहकारिता विभाग में हुए घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल एक्शन मोड़ में आ गए हैं। अपराध निरोधक शाखा की मानें तो यह घोटाला 100 करोड़ से बढ़कर लगभग 180 करोड़ के आसपास हो सकता है। जबकि घोटाला वर्ष 2018 और 2021 के बीच का है, जिसमें एकीकृत सहकारी विकास परियोजना का है। बताया जा रहा है यह सारा खेल वर्ष 2010-11 से चल रहा है। वहीं अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मामले में मास्टर स्ट्रोक खेला है। उन्होंने वर्ष 1995 से अब तक सहकारिता विभाग की एकीकृत सहकारिता विकास परियोजना (आईसीडीपी) का ऑडिट कराने का फैसला लेकर कांग्रेस को भी सकते में डाल दिया है।

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री मनोहर ने यह फैसला तब लिया, जब विपक्ष उन्हें इस घोटाले को ढाल बनाकर विधानसभा में घेरने की तैयारी में है। विपक्ष इस बार 20 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाला है। उसका आधार इस घोटाले को ही बनाया गया है। उन्होंने स्वयं मामले की कमान संभालते हुए विभाग के मंत्री डॉ. बनवारी लाल को एक दिन पूर्व तलब कर करीब 1 घंटे तक मामले में पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल अब सहकारिता विकास परियोजना (ICDP) का ऑडिट कराने की तैयारी में है। यह जांच केवल मुख्यमंत्री मनोहर के पिछले कार्यकाल की ही नहीं, बल्कि प्रदेश के 4 पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की भी होगी। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा का कार्यकाल भी शामिल रहेगा। हुड्डा के अलावा इस जांच में पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल, बंसीलाल, ओमप्रकाश चौटाला और वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कार्यकाल भी शामिल रहेगा। जिसमें केंद्र और राज्य सरकार द्वारा भेजी गई ग्रांट की जांच की जाएगी।

घोटाला 1

मंत्री डॉ. बनवारी लाल की सफाई, बोलें नहीं भी मामले की बिल्कुल भी भनक

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बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से तलब किए गए सहकारिता मंत्री मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने अपनी सफाई दी है। जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की पहले बिल्कुल भी भनक नहीं थी। वहीं अंदर की बात मानें तो इस मामले में मंत्री के पारिवारिक सदस्य भी शामिल है। वहीं डॉ. बनवारी लाल ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया है कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुसार इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग द्वारा कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। आरोपियों पर कार्रवाई करने के साथ उन्हें किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं उन्होंने 3 अधिकारियों की बर्खास्तगी की फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी है। उधर जांच का दायरा बढ़ने से मामले में कई बड़े ब्यूरोक्रेट्स भी आएंगे। वर्ष 1995 से लेक अब तक 31 आईएएस सहकारिता विभाग में रजिस्ट्रार रह चुके हैं। इस दौरान प्रदेश के 19 जिलों में 270 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

सीएम मनेाहर

कांग्रेस ने फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने का तैयार किया प्लान

वहीं प्रदेश में इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने भी प्रदेश सरकार को घेरने का प्लान तैयार कर लिया है। कांग्रेस रणनीति तैयार कर रही है कि हरियाणा के बजट सत्र के दौरान सरकार को घेरा जाए और अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए। बुधवार को चंडीगढ़ में हुई विधायक दल की बैठक में इसको लेकर निर्णय लिया गया है। प्रदेश की खट्‌टर सरकार के खिलाफ यह दूसरा अविश्वास प्रस्ताव होगा। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आयुष्मान, खनन और एफपीओ घोटाले को भी मुद्दा बनाने पर फैसला लिया गया। इसके अलावा प्रदेश में बेरोजगारी, कौशल रोजगार निगम की गड़बड़ियों, युवाओं को युद्ध क्षेत्र इजराइल में भेजने, हरियाणा की भर्तियों में बाहरियों को प्राथमिकता देने, भर्ती घोटालों और अग्निपथ योजना जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

तलब

सहकारिता घोटाला और मास्टरमाइंड अन्नु कौशिक?

हरियाणा के सहकारिता विभाग की एकीकृत सहकारी विकास परियोजना में अपराध निरोधक शाखा ने जो घोटाला पकड़ा है, वह 2018 से 2021 के बीच का है। अपराध निरोधक शाखा के अनुसार अधिकारी बार-बार अपने बयान बदलकर इस मामले में पैसा वापस मंगवाने की बात कह रहे हैं, जबकि उन्होंने उनके पास इस मामले में पुख्ता सबूत है कि यह घोटाला इससे भी कहीं बड़ा हो सकता है। घोटाला 100 करोड़ का न होकर 180 करोड़ या इससे भी काफी बड़ा है।

मास्टरमाइंड

अपराध निरोधक शाखा के अनुसार अधिकारियों ने इस पैसे से फ्लैट व जमीन आदि खरीद ली, जबकि इस मामले को छुपाने के लिए फर्जी कागजात लगाकर खानापूर्ति करने का कार्य किया गया। इसको लेकर आरोपियों के खिलाफ अंबाला में करनाल रेंज में विभिन्न धाराओं में 11 मामले भी दर्ज किए हैं। इस घोटाले में नोडल ऑफिसर नरेश गोयल को बर्खास्त कर दिया गया है। उनकी जगह योगेश शर्मा को सहायक रजिस्ट्रार लगाया है। इस घोटाले की मास्टरमाइंड विभाग की असिस्टेंट रजिस्ट्रार अन्नु कौशिश को बनाया गया है, जबकि प्राइवेट कंपनी मालिक स्टालिन जीत सिंह भी मुख्य आरोपी है।

घोटाला 2

विदेश में सेटल होने की फिराक में थे दोनों मास्टरमाइंड

बताया जा रहा है कि सारे घोटाला की मास्टरमाइंड अन्नु कौशिक शाही जीवन जीने की शौकीन है। उन्होंने सारा पैसा हवाला के जरिए दुबई और कनाडा में भेज दिया था। इतना ही नहीं यही नहीं इस मामले के अन्य मास्टरमाइंड स्टालिन जीत सिंह व अन्नु कौशिक दोनों ही विदेश में सेटल होने की फिराक में थे। अपराध निरोधक शाखा ने उन दोनों को पहले ही धर लिया। यही नहीं इस मामले में 22 करोड़ की एफडी तक हड़प ली गई। जिसमें चपरासी से लेकर जीएम स्तर के अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। अब तक इस मामले में 6 राजपत्र अधिकारी, 4 अन्य अधिकारियों सहित 4 निजी व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।

मंत्री बनवारी लाल.

विभागीय जांच के बाद लिया गया बड़ा एक्शन

वहीं सहकारिता विभाग में हुए घोटाले को लेकर हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल का कहना है कि सबसे पहले उन्हें जब मामले में एक व्यक्ति की शिकायत मिली तो बड़ा एक्शन विभागीय जांच के बाद लिया गया। मीडिया सैकेटरी सीएम प्रवीण अत्री ने भी कहा है कि जब सहकारिता मंत्री को बॉबी ने यह जानकारी लिखित शिकायत में दी तो उन्होंने विभागीय जांच करवाई। डॉ. बनवारी लाल का कहना है कि उन्हें पहले जो शिकायत मिली, वह सोसायटियों से संबंधित घोटालों की थी। जिसमें कुछ लोग निलंबित और स्थानांतरित किए गए। अपराध निरोधक शाखा की कार्यवाही के बाद 2 लोगों के प्रॉसिक्यूशन की परमिशन दी गई है। कईयों पर निलंबन व अन्य कार्यवाही चल रही है।