प्रदोष व्रत महीने में दो बार मनाया जाता है और यह भगवान शिव को समर्पित होता है। प्रदोष का अर्थ है अधंकार को समाप्त करना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शुभ दिन पर साधक उपवास करते है और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते है। ऐसा करने से व्यक्ति को खुशी, स्वास्थय, सफलता और मुक्ति का वरदान प्राप्त होता है। फरवरी महीने का आखिरी प्रदोष 21 तारीख को मनाया जाएगा। प्रदोष व्रत को बेहद ही खास माना जाता है।
प्रदोष का उपवास भगवान शिव और माता पार्वती का आर्शीवाद पाने के लिए रखा जाता है। इस दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर संकल्प लेना चाहिए। शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें। पंचामृत से भोलेनाथ का अभिषेक करें। शिव जी को चंदन और पार्वती माता को कुमकुम का तिलक लगाएं। फल और सफेद मिठाई का भोग लगाएं। शिव चालीसा का पाठ करें। आरती से पूजा का समापन करें। सूर्योदय से सूर्यास्त तक कठिन व्रत का पालन करें।
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की त्रियोदशी तिथि की शुरुआत 21 फरवरी 2024 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर होगी और अगले दिन यानी 22 फरवरी 2024 को दोपहर 1 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष व्रत के दिन शिवाजी की प्रदोष काल में पूजा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए 21 फरवरी 2024 को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 15 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 47 मिनच तक रहेगा।
पूजा सामग्री लिस्ट

प्रदोष व्रत के दिन शिवजी की पूजा के लिए धूप, दीप, रोली, अक्षत, चंदन, शमी का पत्ता, फल, फूल, मिठाई, भस्म, धतुरा, बेलपत्र समेत पूजा की सभी सामग्री एकत्रित कर लें।
बुध प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में बुध प्रदोष का बड़ा धार्मिक महत्व है। यह व्रत बच्चों के लिए बेहद कल्याणकारी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो महिलाएं संतान की कामना रखती हैं, उन्हें यह उपवास जरूर रखना चाहिए, क्योंकि इसके प्रभाव से संतान रत्न की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही यह व्रत संतान की सुरक्षा के लिए भी रखा जाता है।
प्रदोष व्रत में शिवलिंग पूजा का महत्व

शास्त्रों के अनुसार इस दिन समस्त जैसे ब्रह्म बेताल, देव, गंधर्व दिव्यात्माएं अपने सूक्ष्म स्वरूप में शिवलिंग में समा जाती हैं। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोषकाल में शिवलिंग के केवल दर्शन करने से सभी जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। साथ ही त्रयोदशी तिथि पर प्रदोषकाल में बिल्वपत्र चढ़ाकर दीप जलाने से अनेक पुण्य प्राप्त होते हैं। पहले इस व्रत के महत्व के बारे में शिवजी ने माता सती को बताया था। शास्त्रों में कहा गया है कि कलियुग में एक मात्र प्रदोष ऐसा व्रत है जो व्यक्ति के रोग, दोष, संतापों का नाश कर खुशियां प्रदान करता है।

