किसान आंदोलन के दौरान 21 फरवरी को युवा किसान शुभकरण की मौत के बाद पंजाब और एचसीबीए की एग्जीक्यूटिव कमेटी ने 23 फरवरी यानी आज काम बंद करने का फैसला लिया था। हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने एचसीबीए के फैसले का विरोध किया है। वहीं एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जो भी वकील आज काम करेगा उसपर 10 हजार रुपये जुर्माना और उसकी सदस्यता खत्म कर दी जाएगी।
वहीं पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के मानद सचिव स्वर्ण सिंह तिवाना की ओर से भी एक नोटिस जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन लगातार किसान यूनियन का समर्थन करता है। वहीं इसमें कहा गया है कि एसोसिएशन बार के सदस्यों से विभिन्न अभ्यावेदन और कॉल प्राप्त हुए है। जिसके बाद कार्यकारी समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है।
यूटी के लॉ अधिकारी भी करेंगे काम
चंडीगढ़ प्रशासन कानून कार्यालय के एक नोट में कहा गया है कि यूटी प्रशासन के सभी संबंधित कानून अधिकारियों को 23 फरवरी 2024 को सूचीबद्ध अपने संबंधित मामलों में उपस्थित होने का निर्देश देता है, क्योंकि काम से दूर रहने का निर्णय जनरल हाउस द्वारा नहीं लिया गया था। यूटी के वरिष्ठ स्थायी वकील अनिल मेहता ने कहा कि हम एचसीबीए के फैसले का विरोध कर रहे हैं और यूटी के कानून अधिकारी अदालतों के सामने पेश होंगे। एचसीबीए के अध्यक्ष विकास मलिक ने कहा कि मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कल अदालत में पेश होने वाले किसी भी व्यक्ति को एचसीबीए द्वारा लगाए गए दस हजार रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। अधिकतम सजा सदस्य को बार से बाहर करने की हो सकती है।
एडवोकेट जनरल ऑफिस ने जारी किया गया नोटिस
हरियाणा के महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन ने फैसले का कड़ा विरोध किया और कहा कि कार्यकारी समिति के कुछ सदस्यों के अदालती कामकाज से दूर रहने के फैसले का कड़ा विरोध किया जाता है। महाधिवक्ता हरियाणा के आदेशानुसार महाधिवक्ता हरियाणा के सभी कानून अधिकारियों को कल कोर्ट में उपस्थित होना होगा। महाजन ने कहा है कि कानूनी बिरादरी को इस मुद्दे से कोई सरोकार नहीं है। एचसीबीए की कार्यकारी समिति जनरल हाउस को विश्वास में लिए बिना ऐसा कोई आह्वान नहीं कर सकती यदि बार एसोसिएशन या कानूनी बिरादरी के किसी सदस्य के साथ कोई घटना हुई है तो बार एसोसिएशन को चिंतित होना चाहिए।
हरियाणा एजी की ओर से कहा गया है कि यह पूरे बार के काम को बंद करने का कोई आधार नहीं है। महाजन ने कहा कि यह घटना आंदोलन के दौरान हुई और बार का कोई भी सदस्य इसमें किसी भी तरह से शामिल नहीं है। इसलिए संपूर्ण बार एसोसिएशन का कार्य से विरत रहने का आह्वान उचित नहीं है। हमने बार के जनरल हाउस को बता दिया है कि जब तक मामले को जनरल हाउस के सामने नहीं रखा जाता और उस पर आगे विचार नहीं किया जाता। हम कॉल का विरोध करते हैं।

