लोकसभा चुनाव की जैसे-जैसे नजदीकियां बढ़ रही हैं, वहीं कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या मनोहर लाल के लिए करनाल लोकसभा सीट की डगर आसान होगी? बता दें कि मनोहर लाल 48 घंटों के अंदर प्रदेश के मुख्यमंत्री और विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्हें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने करनाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार के रूप में उतारा है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यह सीट जीतना इतना आसान रहेगा, क्योंकि प्रदेश में 24 घंटे के अंदर जिस तरह राजनीतिक घटनाक्रम बदले हैं। साथ ही मनोहर लाल को अचानक हरियाणा की राजनीति से केंद्र तक ले जाने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठना भी लाजमी है।
गौरतलब है कि यह सच तभी संभव हो पाएगा, जब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल करनाल लोकसभा सीट से चुनाव जीत जाएं। हालांकि भाजपा पूरे दावे के साथ इस सीट पर मनोहर लाल की जीत पक्की मान रही है। उधर कांग्रेस भी यह टकटकी लगाए बैठी है कि मनोहर लाल की टक्कर में किस मजबूत उम्मीदवार को चुनावी रण में उतारा जाए। लोगों में चर्चा है कि करनाल लोकसभा सीट जीतना इतना आसान नहीं है। जितना भाजपा उसे हल्के में ले रही है। भले ही भाजपा इस सीट पर दो बार अपनी जीत दर्ज करवा चुकी है। बता दें कि वर्ष 2014 में भाजपा प्रत्याशी अश्विनी चोपड़ा और वर्ष 2019 में संजय भाटिया इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं।

वहीं अगर पिछली राजनीति पर प्रकाश डालें तो हरियाणा की राजनीति में पीएचडी माने जाने वाले भजनलाल भी इस सीट पर गच्ची खा गए थे। यहां से उनकी पीएचडी भी धरी की धरी रह गई थी। वहीं बात भाजपा की ही करें तो अर्श से लेकर शीर्ष मंडल तक पहुंचने वाली भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज भी करनाल लोकसभा सीट से 3 बार अपनी हैट्रिक बना चुकी है। यह हैट्रिक कोई जीत की नहीं, बल्कि हार की थी।

माना जाता है कि इस लोकसभा सीट के मतदाताओं को मिजाज कब बदलकर दूसरी तरफ हो जाए, इसका आकलन आज तक राजनीतिक विशेषज्ञ भी नहीं कर पाए। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या मनोहर लाल जल्द प्रदेश की राजनीति से निकलकर केंद्र तक पहुंच जाएंगे।


