श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। वातावरण की हरियाली के कारण इसे हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन सभी शिव भक्त भगवान शिव की अराधना करते हैं।
श्रावण माह में हरियाली अमावस्या बेहद खास मानी जाती है। इस दिन पेड़-पौधे लगाना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि पेड़-पौधे लगाने से घर के सभी दु:ख समाप्त हो जाते हैं।
धर्म में अमावस्या बेहद महत्वपूर्ण कहलाती है। हरियाली अमावस्य प्रसिद्ध तीज से तीन दिन पहले मनाई जाती है। आज सभी मंदिरों, शिवालयों, आश्रमों में बड़ी धूम-धाम से हरियाली अमावस्य मनाई जा रही है।
हरियाली अमावस्या पूजन विधि
हरियाली अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद पूजा करें और व्रत का संकल्प करें। इसके बाद भगवान सूर्य को अर्ध्य देते हुए अपने देवी-पितरों को याद करें। इस दिन पितरों के नाम पर जरूरतमंद को दान और धर्म का कार्य करें। इस दिन भगवान विष्णु और शंकर की पूजा अवश्य करें।
वृक्ष लगाने से पूरी होंगी सभी मनोकामना
शास्त्रों में इस दिन को वृक्षारोपण का विधान बताया गया है। भविष्य पुराण में उल्लेख है कि जिसको संतान नहीं है उसके लिए वृक्ष ही संतान है। वृक्ष लगाने से वृक्ष में विद्धमान देवी-देवता पूजा करने वालों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।
पीपल के पेड़ की करें पूजा
पौराणिक कथाओं के अनुसार दिन-रात ऑक्सीजन देने वाले पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास होता है। पदम् पुराण में कहा गया है कि एक पीपल का वृक्ष लगाने से मनुष्य को सैकड़ों यज्ञ करने से भी अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। पीपल के दर्शन से पापों का नाश, स्पर्श से लक्ष्मी की प्राप्ति और उसकी प्रदिक्षणा करने से आयु बढ़ती है।
हरियाली अमावस्या का क्या है वैज्ञानिक महत्त्व
इस पर्व का जितना धार्मिक महत्त्व है उतना ही वैज्ञानिक औचित्य भी है। हरियाली अमावस्या पर्यावरण संरक्षण के महत्व और धरती को हरी-भरी बनाने का संदेश देती है। पेड़-पौधे जीवंत शक्ति से भरपूर प्रकृति के ऐसे अनुपम उपहार है। पेड़-पौधे पर्यावरण को शुद्ध और संतुलित रखते हैं। आज जब मौसम पूरे विश्व में बदल रहा है तब यह अमावस्या महज़ एक धार्मिक पर्व नहीं है बल्कि पृथ्वी को हरी-भरी बनाने का संकल्प पर्व भी है।

