Haryana के सीनियर आईएएस(IAS) अधिकारी डी सुरेश ने सूबे के पुलिस महानिदेशक(DGP) के खिलाफ ECI को शिकायत दी है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर शिकायत की थी। आईएएस ने एंटी करप्शन ब्यूरो के मौजूदा चीफ और मौजूदा डीजीपी के खिलाफ लिखी चिट्ठी में उनकी टीम के दूसरे अधिकारियों(Officers) पर भी गंभीर आरोप(Allegations) लगाए हैं।
बता दें कि चिट्ठी में आईएएस ने डीजीपी को प्राउडी और नॉन प्रोफशनल बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसीबी के अधिकारी अवैधता और अपराधिकता में लिप्त हैं। उनका आरोप है कि डीजीपी अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए आईएएस डी सुरेश एक्टिव हैं। हरियाणा सरकार के सीनियर आईएएस अधिकारी डी सुरेश ने एंटी कप्शन ब्यूरो और पूर्व एसीबी चीफ व मौजूदा डीजीपी के खिलाफ मोर्चा खोलने की वजह भी बताई जा रही है।

दरअसल अभी कुछ दिन पहले ही एसीबी चीफ ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें उन्होंने डी सुरेश और उनके दो पूर्व सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है। डी सुरेश का आरोप है कि शत्रुजीत कपूर हमेशा से सरकार को गुमराह करते रहे हैं। आईएएस अधिकारी ने पूर्व आईजी विजिलेंस गुरुग्राम सुभाष यादव को पदोन्नति और पोस्टिंग देने पर भी सवाल उठाएं हैं।
चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन
एसीबी और कपूर के खिलाफ डी सुरेश पहले हरियाणा के मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन दोनों जगहों से कोई जवाब नहीं मिलने पर अब उन्होंने नए सिरे से चुनाव आयोग से शिकायत की है। उन्होंने कहा कि वह चुनावी ड्यूटी पर हैं। डी सुरेश का कहना है कि एसीबी ऐसा करके चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में उनके संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में बाधा बन रहा है और यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।
पत्नी ने लगाया था ब्लैकमेल का आरोप
भ्रष्टाचार के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच का सामना कर रहे हरियाणा के आईएएस अधिकारी डी.सुरेश की पत्नी ने भी मई 2023 में एसीबी पर अभद्रता करने और ब्लैकमेल करने के आरोप लगाया था। उन्होंने एसीबी के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की मांग की थी। डी.सुरेश की पत्नी कांति डी सुरेश ने इस बारे में पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। उस समय तत्कालीन डीजीपी थे। 2019 के दौरान गुड़गांव में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में मुख्य प्रशासक रहते हुए आईएएस डी.सुरेश पर एक स्कूल को गलत तरीके से जमीन देने का आरोप है। उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ जमीन वर्ष 1992 की दर से आवंटित कर दी थी।







