Haryana Politics

Haryana Politics : कांग्रेस की टिकटों को लेकर विश्लेषण, उम्मीदवारों की घोषणा में देरी से किसका फायदा? विरोध ठाडे का होवै है, बौदे का कौनी

राजनीति

Haryana Politics : हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर भारतीय जनत पार्टी के प्रत्याशियों को मैदान में उतरे हुए करीब महीना भर हो गया है, जबकि कांग्रेस की जगजाहिर गुटबाजी के कारण प्रत्याशियों की घोषणा लटकी हुई है। ऐसे में राजनैतिक गलियारों और जनता के बीच इससे किसे फायदा व किसे नुकसान पर चर्चा तेज हो गई है। वहीं भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी प्रत्याशियों का गांवों में विरोध प्रदर्शन के बीच नफा नुकसान का आकलन राजनैतिक अपेक्षाओं के कारण जरूरी भी हो जाता है।

बता दें कि भाजपा ने हरियाणा की 6 लोकसभा सीटों पर इस बार नए प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है। मोदी के चेहरे पर वोट मिलने का कांफिडेंस रखने वाली भाजपा को उम्मीद थी कि कुछ प्रत्याशियों के नाम पर पार्टी में भी सहमति न होने पर उनकी हरियाणा में नैय्या पार हो जाएगी। लेकिन पंजाब के किसानों की अगुवाई में शुरू हुए किसान आंदोलन के साइड इफैक्ट का अंदाजा शायद भाजपा को भी नहीं था। शुरूआत में जिला सिरसा और सोनीपत में किसानों की ओर से प्रचार के लिए आए भाजपा प्रत्याशियों का विरोध कर सवाल पूछे गए। इसके बाद यह सिलसिला हिसार, रोहतक, भिवानी, फरीदाबाद और कुरुक्षेत्र में भी देखने को मिला। अब आलम यह है कि प्रत्याशियों को एक दिन में ही कई स्थानों पर किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ठीक वैसी ही स्थिति प्रदेश सरकार में भागीदार रही जननायक जनता पार्टी के नेताओं के साथ भी है।

अजय दुष्यंत चौटाला

किसान प्रचार के लिए आने वाले प्रत्याशियों को एमएसपी कब मिलेगी, प्रधानमंत्री के किसानों से किए गए वायदे का क्या रहा जैसे कई सवालों पर उन्हें घेर रहे हैं। इसको लेकर जजपा के नेता एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का कहना है कि विरोध करने वाले लोग उनके बीच के हैं, उनसे बैठकर मामले को सुलटा लिया जाएगा। साथ ही उनका यह भी कहना है कि विरोध ठाडे़ का ही होता है, बौदे का कौनी। वहीं हाल ही में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल का बयान भी सुर्खियों में है। जिसमें वह कह रहे हैं कि यह कुछ सिरफिरों का काम है। दरअसल इन बयानों के पीछे प्रदेश में सबसे बड़े वोट बैंक जाटों के वोटों के ध्रुवीकरण को लेकर अलग-अलग नेतों की अलग-अलग रणनीति भी झलकती है।

Whatsapp Channel Join

हरियाणा कांग्रेस

बहरहाल हम बात कर रहे हैं कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा में देरी की। राजनीति के पंडितों की मानें तो कांग्रेस की टिकटों में देरी होने पर पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जिस तरह से भाजपा के प्रत्याशियों का विरोध गांवों में देखने को मिल रहा है, उससे एक तरह से कांग्रेस का प्रचार ऑटोमैटिक मोड़ में रहा है। ऐसे में टिकटों की घोषणा में कोई जल्दबाजी न कर कांग्रेस मजबूत उम्मीदवारों पर ही दांव खेलते हुए रणनीति अपनाना चाहती है। वैसे भी कांग्रेस की टिकटों की घोषणा में अकसर देखा जाता है कि नामांकन की तारीख से कुछ दिन पहले ही वह टिकटों की घोषणा करती है।

कांग्रेस 6

बता दें कि हरियाणा में 29 अप्रैल से नामांकन शुरू होने वाले हैं, जिसके लिए सिर्फ एक सप्ताह का समय शेष बचा है। हालांकि यह प्रक्रिया 7 मई तक चलेगी। ऐसे में उनके पास सोच विचार कर प्रत्याशी घोषित करने का समय था। वरिष्ठ पत्रकार हरेंद्र की मानें तो दरअसल कांग्रेस ने टिकट घोषणा में देरी नहीं की, बल्कि भाजपा ने उम्मीदवारों की घोषणा में जल्दी कर दी। ऐसे में भाजपा को इसका नुकसान संभव है, जबकि कांग्रेस को नहीं। इसे इस तरह से भी समझ सकते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हरियाणा में सभी 10 सीटें जीती थी। ऐसे में खोने के लिए उसके पास बहुत कुछ है, जबकि कांग्रेस के पास कुछ नहीं। किसान आंदोलन के चलते जो विरोध देखने को मिल रहा है, उससे पार पाना अभी भाजपा के लिए मुश्किल है।

चुनाव 3 1

माना जा रहा है कि भाजपा की राहों में अभी भी कई अड़चनें नजर आ रही हैं। वहीं जजपा ने स्थिति भांपते हुए इस विरोध को स्वीकार किया है, लेकिन भाजपा की अभी भी समझ में नहीं आ रहा है कि इससे कैसे पार पाया जाए। हालांकि भाजपा इस विरोध को कांग्रेस से प्रायोजित बताने में लगी है। इससे साफ जाहिर है कि टिकट घोषणा के बाद प्रचार में जुटी भाजपा को पहले कदम उठाने का कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस टिकट देरी से इसलिए परेशान नहीं है कि मैदान में उतरे बिना ही उसे फायदा पहुंचता दिख रहा है।

कांग्रेस 7

राजनैतिक पंडितों की मानें तो कांग्रेस को वर्ष 2019 के मुकाबले हरियाणा में फायदा जरूर पहुंचेंगा। पिछली बार वह 10 की 10 सीटें हार गई थी, लेकिन इस बार इंडिया गठबंधन में कुरुक्षेत्र की सीट आप को चली गई, जबकि कांग्रेस के 9 उम्मीदवारों की घोषणा शेष है। ऐसे में अच्छे उम्मीदारों की घोषणा मायने रखती है, न कि यह घोषणा जल्दी हो। बहरहाल एक बात तो स्पष्ट है कि हरियाणा से लोकसभा चुनावों का मुकाबला इस बार रोचक होगा। इसमें ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और उनके बेटे डॉ. अजय चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जजपा) कितना असर डालती है, यह भी देखना दिलचस्प होगा।

अन्य खबरें