Haryana Politics : (राकेश भट्ट, एडिटर इन चीफ, सिटी तहलका) हरियाणा में भाजपा की नायब सिंह सैनी सरकार के सामने खड़ा हुआ संकट लोकसभा चुनाव के दौरान राजनैतिक हथियार बन गया है। तीन निर्दलीय विधायकों का कांग्रेस को समर्थन देने के बाद प्रदेश की सैनी सरकार अल्पमत में आ गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वाकई सैनी सरकार लोकसभा चुनाव के बाद गिर जाएगी या फिर कांग्रेस लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा में सरकार गठन की तैयारी कर रही है? जिस जेजेपी और निर्दलीय विधायकों का समर्थन बहुमत साबित करने के लिए मिल रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो भाजपा की सरकार के पास मौजूदा नंबर से कोई संकट नहीं है। यह सभी बातें कोरी राजनैतिक फायदा लेने के लिए हैं। तीन विधायकों के कांग्रेस को समर्थन देने से प्रदेश की सैनी सरकार पर कोई संकट नहीं आने वाला है। जेजेपी को साथ लिए बिना कांग्रेस की सरकार बन ही नहीं सकती। इन सभी तथ्यों पर प्रकाश डालने से पूर्व आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की सैनी सरकार अल्पमत में हो जाने से एक चुनावी मुद्दा भी बन गया है। विपक्ष ने अपने प्रचार के दौरान भाषणों में कहना शुरू कर दिया है कि अल्पमत में होने के कारण सैनी सरकार कोई संविधानिक निर्णय आगामी समय में नहीं ले सकती।

वहीं हरियाणा के नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो राष्ट्रपति शासन लगाने की बात तक कह डाली है। जानकारों का कहना है कि वोटरों के दिमाग में यह मनोवैज्ञानिक असर डाल सकता है। ऐसे में कांग्रेस का इस समय पर खेले गए दांव से यह चुनाव दिलचस्प हो गया है। लोकसभा चुनाव के चलने के दौरान राजनीतिक दलों की बयानबाजी और सरकार बचाने व बनाने की कवायद जारी रहेगी। आईए विस्तार से समझते हैं कि विधानसभा में इस समय का गणित क्या है?
बता दें कि हरियाणा में विधायकों की कुल संख्या 90 है। जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और पूर्व मंत्री रणजीत चौटाला के चुनाव लड़ने पर इस्तीफा देने के कारण मौजूदा विधायकों की संख्या सदन में 88 रह गई है। वर्तमान में असेंबली में भाजपा के 40, कांग्रेस के 30, दुष्यंत चौटाला की जेजेपी के 10, निर्दलीय 7, इंडियन नेशनल लोकदल 1 और एचएलपी के पास 1 विधायक हैं। सदन में बहुमत के लिए भाजपा और कांग्रेस को 46 विधायकों की जरूरत रहेगी। इसमें जेजेपी का अहम रोल हो सकता है।

बता दें कि हाल ही में मंगलवार को रोहतक में भाजपा को समर्थन दे रहे तीन निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मौजूदगी में अपना समर्थन दिया है। इन निर्दलीय विधायकों में दादरी से सोमवीर सांगवान, पुंडरी से रणधीर गोलन व नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर शामिल है। चौथे निर्दलीय विधायक बादशाहपुर से रविंद्र के समर्थन की बात भी यहां से की गई थी, लेकिन वह रोहतक में होने वाली पत्रकारवार्ता में शामिल नहीं हुए। न ही उन्होंने कांग्रेस को समर्थन देने का कोई बयान जारी किया।
बता दें कि हरियाणा में सरकार को 45 विधायकों का समर्थन चाहिए। वहीं जेजेपी से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा की सरकार निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही है। इनमें से तीन विधायकों के कांग्रेस को समर्थन कर देने के बाद पृथला से निर्दलीय विधायक सहित दो निर्दलियों का समर्थन सरकार के पास रह जाएगा। यानि 45 की जगह सरकार के पास 42 विधायकों की संख्या रहेगी। इनमें से 40 भाजपा के हैं। अभी फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता है, लेकिन चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष इसकी मांग उठाते हैं तो यह संभव है।

मौजूदा स्थिति में जेजेपी के 10 विधायकों में से चार उसके साथ खड़े तो हैं और तकनीकी रूप से फ्लोर टेस्ट में वह उनके साथ नहीं जा सकते। ऐसे में भाजपा के पास सबसे आसान तरीका फ्लोर टेस्ट होने की स्थिति में यह है कि वह जेजेपी के अपने समर्थित विधायकों को अनुपस्थित ही करा दें तो उसे बहुमत साबित करने के लिए 42 विधायक ही चाहिए होंगे। जेजेपी के विधायकों की टू थर्ड यानि सात विधायकों के जरिए पार्टी तुड़वाकर भी वह अपनी राह आसान कर सकती है। इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में मात्र 5 महीने रह जाने पर भी सरकार कोई फार्मूला निकाल सकती हैं। ऐसे में सरकार के पास जेजेपी के विधायकों से समर्थन लेने का एक रास्ता है। एंटी डिफेक्शन लॉ करता है, उसे सात विधायकों का समर्थन होना चाहिए। वह जेजेपी के बागी हो चुके 7 विधायकों में से संभव है। ऐसे में भाजपा की सरकार गिरने की संभावना न के बराबर ही लगती है।
उधर जिस तरह से मुख्यमंत्री का बयान इस सारे घटनाक्रम पर आया, उससे लगता है कि वह अभी निश्चित है। उनका कहना है कि लोग जानते हैं कि किसकी इच्छा क्या है? कांग्रेस को जनता की इच्छाओं से मतलब नहीं है, उनको तो अपनी इच्छाओं से मतलब है। हरियाणा भाजपा के प्रवक्ता जवाहर यादव ने कहा कि कांग्रेस केवल भ्रम फैला रही है। अभी 13 मार्च को ही नायब सैनी सरकार ने बहुमत साबित किया था। उन्होंने कहा कि जहां तक कांग्रेस के सरकार बनाने की संभावना की बात है तो कांग्रेस के पास इस समय 30 विधायक हैं। 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन उसे मिल चुका है। जेजेपी के भी दो विधायक उसके साथ खड़े हैं। दो अन्य निर्दलीय विधायकों का समर्थन वह अभी और कोशिश के बाद ले सकती है। यह संख्या जोड़ भी ली जाए तो कुल 36 ही बनती है, जो कि बहुमत से आंकड़े से 10 कम है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के पास सरकार बनाने का एक ही फार्मूला है कि उसे सभी 10 विधायकों का साथ जेजेपी के साथ मिले। 10 विधायकों का समर्थन लेकर वह सरकार बना सकती है। लेकिन यह सब कुछ कर पाना कांग्रेस के लिए मुश्किल ही नहीं, असंभव लगता है। वैसे राजनीति में कुछ भी होना संभव होता है। इन सभी विधायकों का समर्थन कांग्रेस ले भी लेती है तो राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष विवेक व अधिकार भी महत्वपूर्ण रोल अदा करेंगे। जाहिर सी बात है कांग्रेस को इसमें कोई रियायत नहीं मिलेंगी। यानि कांग्रेस के लिए सरकार बनाने की संभावना न के बराबर रह जाती है।





