Haryana Lok Sabha Election 2024 : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने कहा कि अबकी बार लगता है कि भाजपा दोबारा सत्ता में आसानी से वापस नहीं आने वाली। बशर्ते इस बार यह चुनाव नीट एंड क्लियर होता है। भाजपा ईवीएम में गड़बड़ी नहीं करती है तो उसका फिर से सत्ता में आना मुश्किल है। इन चुनावों में न तो भाजपा की नाटकबाजी चलने वाली है और न ही जुमलेबाजी। भाजपा ने पूंजीपतियों, जातिवाद, संप्रदाय की राजनीति की है।
यह बातें बसपा सुप्रीमो मायावती ने हरियाणा के जिला करनाल लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी सरदार इंद्रजीत सिंह के पक्ष में दशहरा ग्राउंड में आयोजित रैली में लोगों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहीं। इससे पहले मायावती वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों के दौरान करनाल में आई थी। इस दौरान मायावती ने कहा कि आजादी के बाद से ही देश का अधिकतर शासनकाल कांग्रेस के हाथों में रहा है। इन्होंने न तो दलित वर्ग, न ही आदिवासी, न पिछड़ा वर्ग और न ही अन्य वर्गों के लिए काम किया। अब कांग्रेस को देश से बाहर करने का समय आ चुका है।

उन्होंने कहा कि बसपा किसी विरोधी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ रही है। पार्टी ने अकेले ही सभी लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। बसपा गरीबों, मजदूरों और आदिवासियों की आवाज उठा रही है। जिस तरह की भीड़ आज एकत्रित हुई है, उससे लग रहा है कि अबकि बार करनाल से भी लोग बसपा को जिताकर संसद में भेजने का काम करेंगे।
बता दें कि हरियाणा में लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियां के योद्धा चुनावी रण में कूद चुके हैं और पार्टियों ने अपना दमखम दिखाना शुरू कर दिया है। बसपा भी लोकसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। इसी कड़ी में बसपा सुप्रीमो मायावती आज रविवार को करनाल पहुंची। उन्होंने दशहरा ग्राउंड में रैली के दौरान भाजपा और कांग्रेस पर भी जोरदार हमला बोला। मायावती ने कहा कि बसपा किसी विरोधी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ रही। हमने अकेले ही सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।

मायावती ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने पूंजीपतियों, जातिवाद और संप्रदाय की राजनीति की है। उन्होंने दावा किया कि इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा ईवीएम में गड़बड़ी नहीं करती है तो इस बार इनकी नाटकबाजी और जुमलेबाजी चलने वाली नहीं है। इस बार भाजपा का सत्ता में आना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने बड़े-बड़े पूंजीपतियों के घर भरे और उन्हें बचाने में लगी रही। पिछले दिनों इलेक्टोरल बॉन्ड का मामला उठा। बसपा को छोड़कर, कांग्रेस, भाजपा व अन्य पार्टियों ने देश के बड़े-बड़े पूंजीपतियों से बॉन्ड के जरिए मोटा गोलमाल किया। बसपा एक ऐसी पार्टी है, जो किसी धन्नासेठ से पैसे नहीं लेती।





