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कैसे बने मूषक Ganesh बप्पा के वाहन, पढ़िए क्या इसके पीछे की पौराणिक कथा

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Ganesh Chaturthi एक प्रमुख हिंदु त्यौहार है। यह त्यौहार हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस त्यौहार के दौरान भक्त गणेश जी की सजावटी मूर्तियां अपने घरों में और सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित करते हैं। इसके अलावा गणेश जी की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।

साथ ही विभिन्न तरह के भोग लगाएं जाते है और अनंत चतुर्थी के दिन गणेश जी की प्रतिमा को बड़े ही धूमधाम के साथ विसर्जन किया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी 7 सितंबर को शुरू हो गई है और इसका अनंत 17 सितंबर को होगा। इस दिन बप्पा की मूर्ति का विसर्जन कर उन्हें विदाई दी जाएगी। आइए जानते है इस कथा में कि प्रथम पूजनीय विघ्नहर्ता गणेश जी का वाहन मूषक ही क्यों बना?

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार गणपति बप्पा का प्रिय वाहन मूषक पिछले जन्म में एक गंधर्व हुआ करते थे। उनका असली नाम क्रौंच था। एक बार क्रौंच देवराज इंद्र की सभा में पहुंचे, तो गलती से उसका पैर मुनि वामदेव के ऊपर पड़ गया। मुनि वामदेव को क्रौंच का यह व्यवहार अनुचित लगा और उन्होंने क्रोध में क्रौंच को मूषक बनने का श्राप दे दिया।

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मुनि वामदेव के श्राप के बाद क्रौंच उसी समय मूषक बन गए। क्रौंच मुनि वामदेव के श्राप से मूषक तो बन गया, लेकिन उसका विशालकाय शरीर किसी को भी भयभीत करने के लिए काफी था। विशालकाय मूषक के रूप में क्रौंच अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को नुकसान पहुंचाने लगे। यही सब करते हुए एक दिन क्रौंच पराशर ऋषि के आश्रम पहुंचे और वहां तबाही मचा दी।

पराशर ऋषि ने अपने सभी साथी मुनियों के साथ मिलकर मूषक बने क्रौंच के आतंक से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्री गणपति जी की आराधना की। इसके बाद गणेश जी प्रकट हुए और मूषक को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन वह विफल रहे। अंत में गणपति जी ने अपने पाश में मूषक को बंदी बना लिया, इसके बाद गणेश जी ने मूषक से कहा कि तुम्हें जो मांगना है मागलों, लेकिन मूषक ने मना कर दिया और कहा कि आप मुझे अपने साथ रख लीजिए। जिसके बाद गणेश जी ने कहा कि तुम आज से मेरा वाहन बनकर रहोगे। तभी से मूषक गणेश जी की सवारी बन गए।

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