पानीपत में जहां एक ओर पूर्व शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी ने कुछ ही दिनों पहले कांग्रेस(Congress) पार्टी का हाथ थाम लिया था, वहीं सोमवार को ग्रामीण क्षेत्र की राजनीति में तब एक हलचल देखने को मिली, जब नगर-निगम पूर्व पार्षद विजय जैन(Vijay Jain) ने भाजपा पार्टी को अलविदा कह दिया। वहीं उन्होंने व्हाट्सअप के माध्यम से भाजपा जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट को अपना इस्तीफा भेजा। जिस पर जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट(Dushyant Bhatt) ने भी पहले अपने विचार रखें और न मानने पर उन्होंने खुद विजय जैन को कांग्रेस(Congress) में जाने की बधाई दी। इसके बाद कहीं न कहीं दुष्यंत भट्ट को भी अपनी चुप्पी तोड़नी(broke his silence) पड़ी।
वहीं विजय जैन के अपने 180 गाड़ियों के काफिले के साथ भूपेंद्र हुड्डा के सामने कांग्रेस पार्टी ज्वाईन करने पर भाजपा जिला अध्यक्ष दुष्यंत भट्ट ने कहा कि विजय जैन तो क्या पार्टी का बड़े से बड़ा नेता भी यदि भाजपा को छोड़कर चला जाता है, उससे संगठन को रत्तीभर फर्क नहीं पड़ता। विजय जैन हमारा निगम पार्षद था, जो कि पार्टी का सक्रिय सदस्य भी था, परंतु जब महत्वकांक्षाएं सर चढ़कर बोलने लग जाए, तो ऐसे में कोई क्या कर सकता हैं। अब सभी तो चुनाव लड़ नहीं सकते और न ही पार्टी सभी को चुनाव लड़वा सकती हैं, इसलिए पार्टी क्षमता के हिसाब से काम देती हैं। हमने गलत फहमी को दूर करने का प्रयास किया, लेकिन नहीं माने। भाजपा विचारों की पार्टी है, यहां कब किसने भाग्य में क्या हो जाए, किसी को नहीं पता। कांग्रेस बापू-बेटा एण्ड सन्स है, वहां उनके अलावा किसी की चली हैं।

दुष्यंत भट्ट ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कभी पार्षद नहीं बन पाए, परंतु पार्टी ने उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें सीएम कुर्सी का कार्यभार सौंपा। नायब सैनी ने पार्टी में बहुत लंबे समय से मेहनत की है और आज भी कर रहे हैं। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि मनोहर लाल खट्टर की जगह पार्टी उन्हें सीएम घोषित कर देगी। जैन को समझाने पर नहीं माने, इसलिए मेरी ओर से उन्हें शुभकामनाएं।

संगठन पर भरोसा रखने वाला सर्वोपरि
भाजपा देशभक्ति के रास्ते पर चलने वाला राष्ट्रीय संगठन है, रोहिता रेवड़ी के जाने से भाजपा में कोई तूफान नहीं आया, क्योंकि भाजपा कोई प्राईवेट बस नहीं है, जब चाहा हाथ दिया और चढ़ गए, जब चाहा उतर गए। विजय जैन को भाजपा संगठन ने चलना सिखाया, परंतु अब व्यक्तिगत अहंकार आ गया। भाजपा रातो रात भूमिका बदल देती है, विजय जैन से संगठन नहीं हैं, संगठन से विजय जैन जैसे हैं। संगठन पर भरोसा रखने वाला हमेशा सर्वोपरि हैं, भाजपा एक विचार है।








