हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी में आंतरिक कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट ‘हरियाणा मांगे हिसाब यात्रा’ के जरिए समर्थन जुटाने में लगा है, वहीं दूसरी तरफ कुमारी सैलजा ‘Congress Sandesh Yatra’ के जरिए प्रदेश में सक्रिय हैं।
कुमारी सैलजा ने ‘कांग्रेस संदेश यात्रा’ के लिए एक नया पोस्टर जारी किया है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष उदयभान, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की तस्वीरें नहीं हैं। यह गुटबाजी की स्थिति को स्पष्ट करता है।
किरण चौधरी की जगह नया चेहरा
पहले की ‘कांग्रेस संदेश यात्रा’ में कुमारी सैलजा के साथ रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी नजर आते थे। अब किरण चौधरी के बीजेपी में शामिल होने के बाद, सैलजा के खेमे में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह की एंट्री हुई है। नए पोस्टर में महात्मा गांधी, भीमराव आंबेडकर, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीरें हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष उदयभान और हुड्डा पिता-पुत्र का कोई उल्लेख नहीं है।
कांग्रेस में आंतरिक संघर्ष
किरण चौधरी के कांग्रेस छोड़ने के बावजूद पार्टी में आंतरिक संघर्ष जारी है। हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी और आपसी खींचतान विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बता दें कि हरियाणा की 10 में से 5 लोकसभा सीटें जीतने के बाद राहुल गांधी ने यहां के 38 नेताओं से मीटिंग की। जिसमें राहुल ने कहा था- ” गुटबाजी किसी की भी सहन नहीं की जाएगी। सभी नेता यूनिटी बनाएं। सार्वजनिक स्थानों, खासकर मीडिया के सामने एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी न करें।”
कुमारी सैलजा का सोशल मीडिया पर डाला पोस्टर
पोस्टर के साथ कुमारी सैलजा लोकसभा चुनाव में 10 में से 5 सीटों पर जीत का क्रेडिट लेने से भी नहीं चूकी। सैलजा ने लिखा- “कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व मल्लिकार्जुन खड़गे जी और राहुल गांधी जी का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस संदेश यात्रा एक बार फिर से शुरू हो रही है।
लोकसभा चुनाव से पहले यहां यात्रा हुई थी, जिसके अभूतपूर्व परिणाम लोकसभा चुनाव में देखने को मिले। 27 जुलाई को यह यात्रा अंबाला से फिर से आरंभ होगी। सैलजा ने भाजपा के अशोक तंवर को 2 लाख 68 हजार 497 वोटों के भारी अंतर से हराया है।
बीरेंद्र सिंह के जरिए किरण चौधरी की भरपाई
पूर्व CM भूपेंद्र हुड्डा गुट के खिलाफ कांग्रेस में सैलजा, सुरजेवाला और किरण चौधरी का SRK गुट मजबूत था। हालांकि लोकसभा में किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी की भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से टिकट काट दी गई। जिसके बाद किरण चौधरी BJP में शामिल हो चुकी हैं। हुड्डा गुट के खिलाफ खुद को मजबूत रखने के लिए सैलजा और सुरजेवाला अब पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह को साथ जोड़ने में जुटे हुए हैं।
बीरेंद्र सिंह लोकसभा चुनाव से पहले BJP छोड़ कांग्रेस में आए। हालांकि कांग्रेस ने हिसार से उनके सिटिंग सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह की टिकट काट दी। वहीं जब हुड्डा गुट ने चंडीगढ़ में हरियाणा मांगे इंसाफ कैंपेन लॉन्च किया तो बीरेंद्र सिंह को मार्गदर्शक कह दिया। हालांकि बीरेंद्र ने खुद को एक्टिव पॉलिटिशियन बताया।
लोकसभा नतीजे देख लड़ाई
हरियाणा कांग्रेस की यह लड़ाई संगठन की मजबूती से ज्यादा 3 महीने बाद विधानसभा चुनाव में सरकार बनने की सूरत में CM कुर्सी की है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 10 में से 5 सीटें जीती लेकिन इस रिजल्ट को विधानसभा वाइज देखें तो 90 में से 46 सीटों पर कांग्रेस को ज्यादा वोट मिले। हरियाणा में BJP की लगातार 2 बार से सरकार है।
कांग्रेस को एंटी इनकंबेंसी के भी फायदे की उम्मीद है। ऐसे में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को लग रहा है कि राज्य में उनकी सरकार बननी तय है। इसके बाद सीएम कुर्सी पर दावेदारी मजबूत हो, इसलिए दोनों गुट अलग-अलग जोर लगा रहे हैं। इसके जरिए वह एक तरफ पार्टी हाईकमान के आगे यात्रा और कैंपेन का क्रेडिट ले सकेंगे, वहीं उनके समर्थक ज्यादा MLA जीतकर आए तो सीएम कुर्सी के लिए दावा मजबूती से रख सकेंगे।
कांग्रेस में कलह नई नहीं, 2019 में भी टिकट वितरण पर सवाल उठे
हरियाणा कांग्रेस में कलह नई नहीं है। 2019 में भी कांग्रेस में खूब गुटबाजी रही। जिस वजह से भाजपा 40 सीटें लेकर बहुमत से चूकी, लेकिन कांग्रेस को भी सिर्फ 31 सीटें मिली। वहीं पहला चुनाव लड़ने वाली दुष्यंत चौटाला की पार्टी JJP 10 सीटें जीत गई। नतीजा, उन्होंने भाजपा को समर्थन देकर उनकी सरकार बना दी।