Faridabad में एक घंटे के अंदर दो बार भूकंप के झटके(earthquake felt) महसूस किए गए। घटना के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। नेशनल सिस्मोलॉजी सेंटर(NCS) के अनुसार भूकंप का केंद्र फरीदाबाद(Faridabad) में ही था और यह जमीन के अंदर 5 किलोमीटर की गहराई(Depth of 5 km) में स्थित था। पहली बार भूकंप सुबह 10:54 बजे आया और दूसरी बार 11:43 बजे। दोनों बार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.4(2.4 Richter scale) मापी गई।
भारत में भूकंप के खतरों को देखते हुए देश को 4 जोन में बांटा गया है – जोन 2, जोन 3, जोन 4 और जोन 5। इनमें जोन 2 में सबसे कम खतरा होता है और जोन 5 में सबसे अधिक खतरा। हरियाणा के रोहतक जिले का दिल्ली साइड का क्षेत्र जोन 4 में आता है, जबकि हिसार साइड का क्षेत्र जोन 3 में आता है।

फरीदाबाद में आए भूकंप ने लोगों को झकझोर दिया और यह हमें यह याद दिलाता है कि हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए। भूकंप के खतरों को कम करने के लिए उचित सावधानियां और सुरक्षा उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। अपने घरों को भूकंप रोधी बनाएं और सुरक्षित रहें।
फॉल्ट लाइन और भूकंप की वजह
उत्तराखंड के देहरादून से लेकर हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले तक जमीन के नीचे एक फॉल्ट लाइन है। इस फॉल्ट लाइन में अनगिनत दरारें हैं, जिसके कारण इसमें लगातार गतिविधियां होती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, तो कंपन पैदा होता है और इससे भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

भूकंप से बचने के उपाय
भूकंप रोधी निर्माण: घरों को भूकंप रोधी सामग्री से बनाना चाहिए।
- मिट्टी की जांच: मकान बनाने से पहले मिट्टी की जांच जरूर करनी चाहिए।
- कम ऊँचाई वाले मकान: 2-3 मंजिल से ज्यादा ऊंचा मकान नहीं बनाना चाहिए।
- अन्य सावधानियां: मकान बनाने से पहले अन्य सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना चाहिए।

भूकंप के दौरान क्या करें
भूकंप आने पर सुरक्षित स्थान पर जाने का प्रयास करें। यदि आप घर में हैं, तो मेज के नीचे छुपें और अपने सिर को सुरक्षित रखें। बाहर हैं तो खुली जगह पर जाएं और इमारतों से दूर रहें। भूकंप के बाद संभावित झटकों के लिए तैयार रहें और जरूरत पड़ने पर राहत सेवाओं से संपर्क करें।







