कालका देवी गुफा मंदिर या कालका देवी मंदिर(Kalka Devi Cave Temple) पाकिस्तान(Pakistan) के सबसे पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक है। यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अरोर में कालका पहाड़ियों में एक प्राकृतिक गुफा के अंदर स्थित है। यह मंदिर कालका देवी के स्थान के रूप में जाना जाता है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों ही आते हैं। भारत से हिंदू भी आते हैं, लेकिन मंदिर में आने वाले अधिकांश श्रद्धालु मुस्लिम(Muslim devotees) पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं।
यह पाकिस्तान के ऐतिहासिक हिंदू मंदिरों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार देवी कालका हिंगलाज माता मंदिर जाते समय इस स्थान पर प्रकट हुई थीं। मंदिर के कार्यवाहक के अनुसार कालका गुफा मंदिर में दो सुरंगें हैं, जो हिंगलाज माता मंदिर से जुड़ती हैं। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है। षष्ठी भाषा में कालका शब्द का अर्थ शक्ति होता है। हर महीने के पहले सोमवार की शाम को भक्त मंदिर में आते हैं। पाकिस्तान में कालका गुफा मंदिर सिंध प्रांत के अरोर सक्कर में कालका पहाड़ियों की गुफा में स्थित एक महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर है।

अगर इस मंदिर के इतिहास की बात करें तो ऐसा माना जाता है कि जब काली माता हिंगलाज माता के मंदिर जा रही थी, तो इस दौरान उन्होंने इस मंदिर के स्थान पर कुछ समय गुजारा था। इस मंदिर में दो सुरंगे भी है जो सीधे हिंगलाज माता के मंदिर में निकलती है, जो बलूचिस्तान में स्थित है। सिंध के ज्यादातर हिंदू हर महीने के पहले सोमवार की रात को कालका देवी के मंदिर दर्शन करने पहुंचते है। चारों ओर पहाड़ों से गिरे होने की वजह से यह मंदिर बाहर से जितना सुंदर है, अंदर से भी उतना ही सुंदर सजा हुआ है।

एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ती
माना जाता है कि मंदिर में एशिया की दूसरी सबसे बड़ी देवी काली की मूर्ति है, जिसके कारण कलात मंदिर भारत के हिंदू तीर्थ यात्रियों को भी आकर्षित करता है। ये उत्सव स्थानीय हिंदुओं के बीच उत्साह के साथ मनाया जाता है। बलूचिस्तान पिछले साल बाढ़ से तबाह हो गया था। बाढ़ का पानी अभी भी प्रांत के बड़े हिस्से में बना हुआ है। बाढ़ के पानी की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है और सामान्य जीवन शुरू करने में मुश्किलें आ रही हैं।