Karnal के भाजपा नेता मनोज वधवा(Manoj Wadhwa) ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। वधवा एक प्रमुख पंजाबी चेहरा हैं। 2019 में मनोज वधवा(Manoj Wadhwa) की पत्नी आशा वधवा ने मेयर चुनावों(Mayor Election) में आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव(Election) लड़ा था और उन्हें करीब 60 हजार वोट मिले थे। वहीं भाजपा की प्रत्याशी रेनू बाला गुप्ता को केवल 8 हजार वोट से ही जीत मिली थी।
बता दें कि मनोज वधवा को सभी पार्टियों का समर्थन था और उन्होंने पहले भी इनेलो(INLD) के खिलाफ चुनाव लड़ा था। वर्ष 2018 में उन्होंने अपनी पत्नी को मेयर प्रत्याशी के रूप में उतारा था। यहां तक कि कुछ लोगों को लगा कि उन्हें भाजपा में रहते हुए मेयर चुनावों की तैयारी करने की योजना थी। फिलहाल उन्होंने पार्टी छोड़ दी हैं और इसके बाद कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो उन्हें करनाल विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
मनोज वधवा की इस संभावित चलावट से नायब सिंह सैनी के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। इससे पहले वधवा ने दिसंबर 2019 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। जब उनसे कांग्रेस में शामिल होने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने यह कहा कि अभी उन्होंने इसके बारे में सोचा नहीं है।
महत्वपूर्ण होगा राजनीतिक फैसला
कांग्रेस में मनोज के जाने के बारे में चर्चाएं हैं, लेकिन फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह जल्द ही स्पष्ट होगा कि उन्हें किस पार्टी में जाना है। मनोज वधवा का पंजाबी समाज में बड़ा पसंदीदा है। उनके पास करनाल में करीब 66 हजार वोट हैं, जो की बड़ी संख्या है। यह एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है, अगर वह कांग्रेस में शामिल होते हैं और उपचुनाव में प्रत्याशी बनाए जाते हैं, तो भाजपा को चर्चित चेहरे का सामना करना पड़ सकता है। इन सबके बावजूद निर्णय लेने की प्रक्रिया अभी जारी है। लेकिन एक बात साफ है कि मनोज वधवा का राजनीतिक फैसला महत्वपूर्ण होगा।