हरियाणा के पलवल जनपद में महंगाई के समय में किसान अपनी आजीविका को सुरक्षित बनाने के लिए परंपरागत खेती को छोड़कर एक नई दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं – वह फूलों की खेती कर रहे हैं। पातली गाँव के किसान रणवीर सिंह इस बदलाव का एक उदाहरण हैं, जो कम लागत और मेहनत से फूलों की खेती करके हर साल 30 लाख रुपये कमा रहा हैं।
रणवीर सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा किसानों को इस नए क्षेत्र में समर्थन प्रदान किया जा रहा है, जिससे उन्हें अनुदान मिल रहा है। उन्होंने जापान से बीज मंगवाकर अपने खेत में फूलों के पौधे तैयार किए हैं, जैसे कि गुलदाबरी, ब्लडेजी, कैल, ग्लैड, रजनीगंधा, ब्राजीका और स्टॉक।
परंपरागत खेती में मेहनत ज्यादा और मुनाफा कम
किसान का कहना है कि पहले वे परंपरागत खेती करते थे, लेकिन मेहनत और लागत के बावजूद मुनाफा कम था। अब फूलों की खेती में कम मेहनत और ज्यादा मुनाफा हो रहा है। उनकी आजीविका का स्रोत बन गया है और वह अपने पूरे परिवार के सहयोग से काम करते हैं। रणवीर सिंह का कहना है कि वह फूलों को दिल्ली की फूलमंडी में बेचते हैं, जहां से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। उनकी खेती में नेट हाउस का उपयोग करके फूलों को बनाए रखने के लिए उन्होंने विशेष उपाय अपनाए हैं। उनका सुझाव है कि अब किसानों को परंपरागत खेती की बजाय फूलों की खेती करनी चाहिए, ताकि कम मेहनत से ज्यादा मुनाफा कमा सके और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सके।

