Patanjali आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंतजलि को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा है कि वो पंतजलि के जवाब से संतुष्ट नही है। योगगुरु बाबा रामदेव सुप्रीम कोट में पेश हुए है। उनके साथ आचार्य बालकृष्ण भी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले मं बाबा रामदेव को अदालत में पेश होने का समन जारी किया था। अदालत ने पंतजलि और आचार्य बालकृष्ण को अदालत के नोटिस का जवाब नहीं देने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव की ओर से सीनियर वकील बलवीर सिंह पेश हुए। अदालत ने कहा कि आपके खिलाफ दो मामले है। जिनका जवाब देना होगा।
पंतजलि विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंट ने सुनवाई की। जस्टिस कोहली ने पूछा कि बाबा रामदेव और दूसरे अवमाननाकर्ता का हलफनामा कहां है। पंतजलि के वकील ने जवाब दिया कि वे कोर्ट के अंदर है भीड़ के कारण हम उन्हें यहां नहीं लाए।

जस्टिस कोहली ने पूछा कि बाबा रामदेव के जवाब के बारे में क्या कहना है वकील ने जवाब दिया कि प्रतिवादी 5 कंपनी है प्रतिवादी 6 प्रबंध निदेशक है। जिस्टिस कोहली ने कहा हम 27 फरवरी के आदेश के पैरा 9 को देख रहे है और यह इस बारे में था कि कंपनी और प्रबंधक के खिलाफ अवमानना क्यों नहीं होनी चाहिए और पिर उस हलफनामे को दाखिल न करने का आदेश दिया जाए।
जस्टिस अमानतुल्लाह ने कहा आपको पहले हमें दिखाना होगा कि दोनों जवाब कहां है। इसके बाद बाबा रामदेव के वकील ने आचार्य बालकृष्ण का हलफनामा पढ़ा। न्यायमूर्ति कोहली ने कहा एक बार जब यह अदालती कार्यवाही है और निर्देश है तो इसकी जानकारी देने के लिए कौन जिम्मेदारी है। यदि यह बचाव योग्य नहीं है तो आपकी माफी काम नही करेंगी। यह सुप्रीम कोर्ट का दिए गए वचन का घोर उल्लघन है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके वचन का पालन किया जाना चाहिए जो कि गंभीर है।

न्यायधीश कोहली ने आगे कहा जो बात हमें प्रभावित करती है वह यह है कि आपने उसके बाद क्या किया। आपने अदालत के नोटिस का उल्लंघन किया। हम इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। जस्टिस कोहली ने कहा आपकी माफी मांगने का क्या कारण है आपको मंत्रालय को सूचित करना चाहिए था। आपको यह सब सरकार को बताना चाहिए था।
अदालत में सिंह ने कहा कि वह व्यक्तिगत रुप से माफी मांगना चाहते है और हम बेहतर हलफनामा दायर कर सकते है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम ये नहीं सुनना चाहते। हम पहले अवमानना का मामला खत्म करेंगे। आपका अदालत में पेश नहीं होना दर्शाता है कि आप इसे गंभीरता से नहीं ले रहे।

जस्टिस अमानतुल्लाह बोले आप अपने जाल में फंस गए है। यहां खड़े होने वाले पहले व्यक्ति को माफी मांगना चाहिए थी किसी भी वकील को पहले नहीं उठना चाहिए था। सीनियर वकील सिंह ने कहा यह मेरा फैसला था कि आप यहां न आएं और मुझे सुनवाई के दौरान पहले बात रखने दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा जब अवमाननाकर्ता को बुलाया जाता है तो वकील के पास कोई अधिकार नहीं होता है। यहीं वह बुनियादी बात है हमें आपको सिखानी नहीं है।
जस्टिस कोहली बोले हालात यहां तक कैसे पहुंचे। यह केवल दिखावटी सेवा है। आप प्रेस के पास क्यों पहुंचे। यह एक आजाद देस है। आपको कोई नहीं रोक सकता। लेकिन आप जानते है कि प्रेस को संबोधित करने की आपकी क्या सीमाएं थी और आपने उनमें से प्रत्येक का उल्लघन किया।

बाबा रामदेव के वकील ने कहा कि ये उनके लिए एक सबक है। जस्टिस कोहली ने कहा हम यहां उन्हें सिखाने के लिए नहीं है। उन्हें जो सम्मान मिलता है और उसकी तुलना आम नागरिकों से नहीं की जा सकती। उनका दावा है कि उन्होंने बहुत अच्छा शोध किया है। हम सिर्फ इसी वजह से इसे गंभीरता से ले रहे है। हम आमतौर पर अवमानना के मामलों के पालन नहीं करते है और यह कानून की महिमा का एहसास कराने के बारे में है। लेकिन कुछ अपवाद और शायद आप उस अपवाद के अंतर्गत आ रहे है।

