Gurugram से BJP के उम्मीदवार और केंद्र सरकार के मंत्री राव इंद्रजीत सिंह(Rao Inderjit) को अपने लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम बाहुल्य नूंह(Nuh) इलाके में हार का खतरा है। एक चुनावी जनसभा में रेवाड़ी के पंजाबी सभा द्वारा उन्होंने कहा कि कई बार उन्हें नहीं पता चलता कि इलाके में लोग उनके साथ हैं या नहीं। चुनाव के समय वे सहयोग नहीं मिलता जैसा उनकी उम्मीद थी।
उन्होंने नूंह में लोगों को अपने साथ जिताने की अपील की है। नूंह जिले में लगभग 8 लाख वोटर्स हैं और मुस्लिम(Muslim) बाहुल्य के तीन विधानसभा सीटों पर कांग्रेसी विधायक(Congress MLA) हैं। पिछले दो लोकसभा चुनावों में भी उन्हें नूंह से हार का सामना करना पड़ा है। राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पिछले दो बार वे गुरुग्राम से जीते हैं, लेकिन नूंह से हारा है। इस बार वे अपनी रणनीति को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं। राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल के बड़े नेता हैं, जो दो बार महेंद्रगढ़ और तीन बार गुरुग्राम से लोकसभा सांसद रह चुके हैं।

उन्हें 2009 में कांग्रेस की टिकट से गुरुग्राम सीट पर चुनाव जीता था। उसके बाद उन्हें नूंह में भी कुछ समर्थन मिला था, लेकिन 2014 में वे बीजेपी में शामिल हो गए और फिर नूंह में उनकी पकड़ कमजोर होती चली गई। नूंह में पिछले साल जुलाई में हिंसा हुई थी, जिसमें दो होमगार्ड जवानों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इससे नूंह में उनकी पकड़ और भी कमजोर हो गई।

तीनों सीटों से कांग्रेसी कैंडिडेट से मिले कम वोट
कांग्रेस से BJP में आने के बाद वह भाजपा उम्मीदवार के तौर पर लगातार 2 बार गुरुग्राम से चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि दोनों ही बार उन्हें नूंह जिले से झटका लगा। यहां की मुस्लिम बाहुल्य तीनों सीटों से उन्हें कांग्रेसी कैंडिडेट से कम वोट मिले। बीजेपी ने उन्हें तीसरी बार इसी सीट से चुनावी मैदान में उतारा है। इस बार पहले के दो चुनाव के मुकाबले राव इंद्रजीत सिंह मुस्लिम बाहुल्य इलाके में अपनी रणनीति को नई धार देते हुए बेहतर स्थिति बनाने में जुटे हुए हैं।







