हरियाणा सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और विश्वविद्यालयों में संवेदनशील पदों पर कार्यरत सभी अनुबंधित (कच्चे) कर्मचारियों को हटाने का आदेश जारी किया है। सरकार ने यह कदम लगातार मिल रही भ्रष्टाचार की शिकायतों और गोपनीय सूचनाओं के लीक होने जैसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए उठाया है। अब इन महत्वपूर्ण पदों पर केवल नियमित (पक्के) कर्मचारियों और अधिकारियों की ही नियुक्ति की जाएगी।
मुख्य सचिव के अधीन आने वाले मानव संसाधन विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों और निगमों के प्रबंध निदेशकों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत अपने-अपने विभागों में संवेदनशील पदों की पहचान करें और उन पर नियमित कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करें।
इन पदों में विशेष रूप से वित्त और मानव संसाधन विभाग की जिम्मेदारियां शामिल हैं, जिन्हें अत्यंत महत्वपूर्ण और गोपनीय माना जाता है। सरकार का मानना है कि इन विभागों में अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों की मौजूदगी से नीतिगत और वित्तीय जानकारी असुरक्षित हो सकती है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
सरकार ने अपने 13 अगस्त 2021 को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि वित्तीय और संवेदनशील कार्यों का प्रभार केवल ग्रुप ए, बी, सी या समकक्ष स्थायी कर्मचारियों को ही दिया जाना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में संविदा पर नियुक्त कर्मचारी इन पदों को नहीं संभालेंगे।
मानव संसाधन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई विभाग अभी भी पुराने आदेशों की अवहेलना कर संवेदनशील पदों पर कच्चे कर्मचारियों को तैनात किए हुए हैं, जो अब नियम विरुद्ध माना जाएगा। सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचारमुक्त शासन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।