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हरियाणा के छात्र को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनाई ₹5000 जुर्माने की सजा, जानें पूरा मामला

हरियाणा की बड़ी खबर

➤ प्रवेश परीक्षा में न बैठने पर दाखिले की याचिका खारिज
➤ कोर्ट ने कहा याचिका ‘कानून में अनुचित’
➤ छात्र पर लगाया गया ₹5000 का जुर्माना


पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बीए एलएलबी (ऑनर्स) कोर्स में सीधे दाखिले की मांग पर एक छात्र की याचिका को न सिर्फ खारिज किया बल्कि उस पर ₹5000 का जुर्माना भी ठोक दिया। यह मामला हरियाणा के जींद निवासी से जुड़ा है, जिसने बिना प्रवेश परीक्षा दिए दाखिले की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति यशवीर सिंह राठौड़ की खंडपीठ ने याचिका को “कानून में पूर्णत: अनुचित” करार देते हुए कहा कि यह न्यायिक व्यवस्था का दुरुपयोग है और इससे मेधावी छात्रों के साथ अन्याय हो सकता है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय ने पहले 2-3 जुलाई को परीक्षा तय की थी, लेकिन बाद में यह 16 जुलाई को हुई और उसे नई तारीख की जानकारी नहीं मिल पाई, इसलिए वह परीक्षा नहीं दे सका। उसने अदालत से मांग की थी कि या तो उसे दाखिला दिया जाए या फिर उसके लिए अलग से परीक्षा कराई जाए। लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि नई तारीख वेबसाइट पर समय से डाल दी गई थी और व्यक्तिगत रूप से सूचना देना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी नहीं थी।

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अदालत ने कहा कि अगर ऐसे तर्कों को मान्यता दी गई तो पूरे शिक्षा तंत्र में अव्यवस्था फैल जाएगी और वास्तविक मेहनत करने वाले छात्र पीछे रह जाएंगे। इसी आधार पर याचिका खारिज करते हुए ₹5000 का जुर्माना लगाया गया। इस फैसले को एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि कोर्ट अब ऐसे “असंगत और मनमाने” तर्कों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।