➤ ट्रिपल तलाक से राहत, हलाला पर चिंता जताई
➤ लव मैरिज में परिवार की सहभागिता जरूरी बताई
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा विजया रहाटकर ने कहा कि देश के कानून जेंडर न्यूट्रल हैं, जो महिला और पुरुष के बीच कोई भेदभाव नहीं करते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला की शिकायत गलत पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है।
भिवानी के पंचायत भवन में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भिवानी, चरखी दादरी और झज्जर जिलों की महिलाओं की समस्याएं सुनीं। इस दौरान कुल 35 मामलों की सुनवाई हुई — जिनमें 19 भिवानी, 8 चरखी दादरी और 8 झज्जर से थे। सबसे अधिक मामले घरेलू हिंसा, साइबर क्राइम और मातृत्व अवकाश से जुड़े थे।
लिविंग रिलेशन और लव मैरिज के मुद्दे पर विजया रहाटकर ने कहा कि भले ही यह कानूनी अधिकार है, लेकिन युवाओं को इस फैसले में परिवार की सहभागिता और स्वयं विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि भविष्य की परेशानियां कम हों। उन्होंने कहा कि बालिग होने पर युवाओं को अपने निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन समझदारी से लिया गया फैसला जीवन में संतुलन लाता है।
ट्रिपल तलाक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कानून बनने के बाद इस तरह के मामलों में कमी आई है, लेकिन हलाला जैसी प्रथाओं के कारण महिलाएं अब भी पीड़ा झेल रही हैं। उन्होंने महिला आरक्षण बिल की सराहना करते हुए कहा कि इससे महिलाओं का नेतृत्व उभर कर सामने आया है और उनकी निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ी है।
रहाटकर ने बताया कि ‘शी इज चेंज मेकर’ कार्यक्रम के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी पीड़िता पत्र, ईमेल या महिला आयोग की ऐप के जरिए शिकायत दर्ज करवा सकती है। सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश से दर्ज किए गए हैं, जो आयोग की सक्रियता और लोगों के भरोसे को दर्शाता है।