➤ चंडीगढ़ डिनर में 11 भाजपा और 1 कांग्रेस विधायक की मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को हवा दी
➤ राव इंद्रजीत के तीखे बोल, सैनी सरकार पर परोक्ष हमला; CM ऑफिस में ‘बाबुओं की सरकार’ चलने का आरोप
➤ हरियाणा भाजपा में ’75 प्लस’ के फॉर्मूले को ठेंगा दिखाता एकमात्र मंत्री परिवार – पिता केंद्र में, बेटी राज्य में
हरियाणा की सियासत में फिर डिनर डिप्लोमेसी ने हलचल पैदा कर दी है, जब केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने चंडीगढ़ स्थित अपनी बेटी आरती राव के आवास पर दक्षिण हरियाणा के 11 भाजपा और एक कांग्रेस विधायक को रात्रिभोज पर बुलाया। यह मुलाकात महज सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक जमीन को टटोलने और एक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
डिनर के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का तूफान उठ खड़ा हुआ है। खासतौर पर इसलिए, क्योंकि 15 जून को CM नायब सैनी की मौजूदगी में राव इंद्रजीत ने मंच से दो टूक कहा था – ‘हमने सरकार बनाई है, हमारा हक है, हमारे काम किए जाएं।’ इसके जवाब में CM सैनी ने ‘सवा तीन करोड़ जनता की सरकार’ कहकर जातीय राजनीति से खुद को अलग बताया था। सीएम के पद दावेदारी पहले भी राव जता चुके हैं और अब इस पैतरे से हरियाणा की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
डिनर के बाद उसी दिन राव इंद्रजीत का इंटरव्यू जारी हुआ, जिसमें उन्होंने सीधा निशाना साधा कि “मुख्यमंत्री सैनी जरूर हैं, लेकिन ऑफिस में आज भी मनोहरलाल के बाबू ही चला रहे हैं”। यही नहीं, उन्होंने खुद को हरियाणा में सबसे बड़ा जनाधार वाला नेता बताते हुए पार्टी में अपने खिलाफ साजिशों की बात भी की।
यह पहला मौका नहीं है जब राव डिनर के जरिए भाजपा नेतृत्व पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हों। 2015 और 2021 में भी ऐसे डिनर सियासी शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखे गए थे। इस बार फर्क यह है कि भाजपा की तीसरी बार सत्ता वापसी में अहीरवाल बेल्ट का निर्णायक योगदान रहा है, और वहां राव इंद्रजीत ही सर्वमान्य चेहरा हैं।
राव के डिनर में कांग्रेस की मंजू चौधरी की उपस्थिति भी दिलचस्प रही, जिन्होंने प्रचार के दौरान कहा था कि “राव इंद्रजीत उनका साथ देंगे।” ये वही सीट है जहां भाजपा को अप्रत्याशित हार झेलनी पड़ी थी।
भाजपा के ‘एक परिवार-एक पद’ सिद्धांत के बीच राव परिवार का अपवाद बनना भी भीतरखाने की खींचतान का विषय है। जहां पिता राव इंद्रजीत केंद्र में मंत्री हैं, वहीं बेटी आरती राव हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री। ऐसे में यह डिनर आने वाले महीनों में संगठनात्मक बदलावों की नींव तो नहीं रख रहा?
राव इंद्रजीत का यह बयान भी काफी कुछ कहता है:
“अगर गोद में पड़ी तो मुख्यमंत्री बनूंगा। मैं किसी के सामने झुकता नहीं, जिसकी वजह से मेरी कई मुख्यमंत्रियों से बनी नहीं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह डिनर असल में अहीरवाल में भाजपा नेतृत्व के विकल्प की तलाश, दिल्ली की नाराजगी और CM सैनी के खिलाफ एक संदेश का संयुक्त संकेत हो सकता है। ये डिनर उतना ही प्रतीकात्मक है जितना कि दबाव का औजार।