Haryana News : टाइम मैगजीन ने दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची जारी की है। जिसमें इस बार भी भारतीयों को जगह मिली है। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला, भारतीय महिला पहलवान एवं ओलंपिक विजेता साक्षी मलिक, अभिनेता देव पटेल, अमेरिकी ऊर्जा विभाग के ऋण कार्यक्रम कार्यालय के निदेशक जिगर शाह, खगोल विज्ञान के प्रोफेसर और येल विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर प्रियंवदा नटराजन और भारतीय मूल की रेस्तरां मालकिन अस्मा खान सूची में शामिल किए गए हैं।
बता दें कि अमेरिका की टाइम मैगजीन ने भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक को आइकॉन की लिस्ट में प्रभावशाली हस्ती माना है। मैगजीन ने टॉप 100 हस्तियों के नामों की घोषणा की गई है। इसमें साक्षी मलिक के अलावा भारत से बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला और अभिनेता एवं डायरेक्टर देव पटेल का नाम शामिल है। मैगजीन में नाम पाने वाली हरियाणा की इकलौती महिला पहलवान साक्षी मलिक है। मैगजीन ने इनका नाम शामिल करते हुए कहा कि साक्षी ने कुश्ती में यौन शोषण के खिलाफ बृजभूषण सिंह के खिलाफ एक मुहिम छेड़ी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की भी साक्षी ने अग्रणी भूमिका निभाई है।

फिल्म निर्माता निशा पाहुजा ने ओलंपियन साक्षी मलिक के बारे में लिखा है कि वह भारत के सबसे प्रसिद्ध पहलवानों में से एक थीं। गौरतलब है कि मलिक ने बृजभूषण सिंह के करीबी के डब्लूएफआई अध्यक्ष बनने से खफा थीं और इसी वजह से उन्होंने खेल से सन्यास ले लिया है। उन्होंने बृजभूषण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। पाहुजा का कहना है कि उन्होंने अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी है। इतना ही नहीं, साक्षी मलिक ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए अपनी कुश्ती से भी संन्यास ले लिया है। वहीं इस सम्मान को पाने पर साक्षी मलिक ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है कि वर्ष 2024 की 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल होने पर मुझे गर्व है। प्रभावशाली लोगों में शामिल होना अनूठा अनुभव है। यह ओलिंपिक पदक जीतने के समान खुशी है।
वहीं यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट येलेन ने अजय बंगा के बारे में टाइम की प्रोफाइल में कहा कि वह एक बड़ी कंपनी का नेतृत्व करने के बाद विश्व बैंक में आए हैं। उन्होंने लाखों बैंक रहित लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। उन्होंने विश्व बैंक में गरीबी मुक्त दुनिया बनाने के लिए एक नया दृष्टिकोण रखा है। इस दृष्टिकोण को पूरा करने के लिए वे लगातार आगे बढ़ रहे हैं। उधर निर्देशक, निर्माता व लेखक टॉम हार्प ने भट्ट को अद्भुत प्रतिभा बताया है। उन्होंने टाइम के प्रोफाइल में कहा कि आलिया भट्ट न केवल दुनिया की शीर्ष अभिनेत्रियों में से एक हैं, बल्कि वह एक व्यवसायी और परोपकारी महिला भी हैं, जो ईमानदारी से आगे बढ़ रही हैं।
वहीं नडेला के बारे में टाइम ने कहा कि वह हमारे भविष्य को आकार देने में बेहद प्रभावशाली हैं। यह मानवता के लिए अच्छी बात है। ओपनएआई में माइक्रोसॉफ्ट का निवेश और मिस्ट्रल एआई के साथ साझेदारी उन्हें एआई क्रांति में सबसे आगे रखती है। टेक्नोलॉजिस्ट सत्या एआई को इंसानों को सशक्त बनाने वाले उपकरण के रूप में देखते हैं। साथ ही अभिनेता पटेल के बारे में ऑस्कर विजेता अभिनेता डेनियल कालूया का कहना है कि वह अच्छाई बिखेरते हैं। वह जब भी स्क्रीन पर आते हैं तो उनकी मानवता चमकती है। उस वक्त आपके पास उनका समर्थन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
गौरतलब है कि हरियाणा के जिला रोहतक के गांव मोखरा में कुश्ती खेल नहीं, एक जुनून है। यही साक्षी मलिक का पैतृक गांव भी है। साक्षी का जन्म 3 सितंबर 1992 को हुआ था। गांव में एक 60 साल पुराना शंकर अखाड़ा है, जिसकी शुरुआत मदिया पहलवान ने 1963 में किया था। 89 वर्षीय मदिया गांव में गुरुजी (कोच) के नाम से जाने जाते हैं। मदिया पहलवान की देखरेख में शंकर अखाड़े से भारत के कुछ सर्वश्रेष्ठ पहलवानों निकले हैं। दिलचस्प यह है कि इस अखाड़े से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले करीब 11 जवान कारगिल युद्ध में देश के लिए लड़े थे। साक्षी जब करीब 3-4 साल की थी, तो अन्य बच्चों के साथ शंकर अखाड़े में जाती थी। वह शायद कुश्ती से उनका पहला जुड़ाव था।
इसके बाद साक्षी ने 12 साल की उम्र में कुश्ती सीखने की शुरुआत की। हालांकि उनकी मां अपनी बेटी को पहलवान नहीं बनाना चाहती थी। मां ने कहा था कि लड़कियां बाउट करते वक्त छोटी छोटी कास्टयूम पहनती हैं, इसलिए पहलवान उन्हें पसंद नहीं। उन्होंने साक्षी को बहुत समझाने की कोशिश की कि जो पहलवान लड़कियां होती हैं, उनकी शादी नहीं होती। वहीं साक्षी के पापा सुखबीर मलिक डीटीसी में बस कंडक्टर हैं। साक्षी ने बचपन में कबड्डी और क्रिकेट खेलने की कोशिश की। लेकिन कुश्ती में लगातार जीत मिलने की वजह से वही उनका पसंदीदा खेल बन गया। हालांकि तब उनके माता-पिता ने यह सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी एक दिन ओलंपिक पदक जीतने वाली देश की पहली महिला पहलवान बनेंगी।

