हरियाणा के सहकारिता विभाग में हुए 100 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो ने शुरू की। जांच के दौरान घोटाला में सामने आया है कि किसानों के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा भेजे गए सरकारी पैसे से करनाल, जीरकपुर, रेवाड़ी में लग्जरी अपार्टमेंट्स में फ्लैट्स खरीदे गए हैं। एसीबी ने मामले में जगाधरी, कैथल, अंबाला में 11 एफआईआर दर्ज की हैं और गुरुग्राम में भी रेड की है।
बता दें कि केंद्र ने 2022 में सहकारिता विभाग को 600 करोड़ रुपए किसानों के लिए जारी किए थे, जिनमें घोटाला किया गया है। एसीबी ने मामले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी की है और उनके खिलाफ केस दर्ज किए हैं। इस घटना के पीछे के सभी पहलुओं की जांच के लिए एसीबी ने एडिशनल डायरेक्टर नरेश गोयल सहित कई अन्य अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया है। एसीबी की जांच में सामने आए खुलासे के बाद, सहकारिता विभाग ने सीनियर ऑडिटर सुमित अग्रवाल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है और विभाग के अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। जिसमें सहायक रजिस्ट्रार अनु कौशिक और उप मुख्य लेखा परीक्षक योगेंद्र अग्रवाल भी शामिल हैं।

ऑडिटर्स ने सभी को सुरक्षित बताया
घोटाले में शामिल अधिकारियों के साथ जुड़े विवाद के बारे में एसीबी के सूत्रों का कहना है कि इन अधिकारियों ने विभाग की ऑडिट ब्रांच के अधिकारियों से मिलीभगत की थी और ऑडिटर्स ने सभी को सुरक्षित बताया था, जिससे घोटाला चलता रहा। विभाग ने सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल के नेतृत्व में 2021 में शुरू की गई। 4 वर्षीय एकीकृत सहकारी विकास परियोजना को इस साल मार्च में ही खत्म करने का निर्णय लिया है। इस परियोजना के तहत किसानों को ट्रेनिंग, लोन, सोलर पंप, भंडार गृह तैयार करने जैसी सुविधाएं दी जाती थीं। जिसमें कुल 38 करोड़ रुपए खर्च हुआ था, जिसमें से 14 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है।

सरकारी पैसे से विभिन्न कंपनियों से बनवाए फर्जी बिल
पहली शिकायत नवंबर 2022 में हुई थी, जिसमें सामने आया कि अधिकारी ने सरकारी पैसे से विभिन्न कंपनियों से फर्जी बिलों के माध्यम से अपार्टमेंट्स खरीदे थे। एसीबी ने मामले में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी की है और जांच जारी है। एसीबी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने मामले में कहा कि भ्रष्टाचारी को कोई भी हो, किसी भी विभाग का हो, दोषी पाए जाने पर कार्रवाई तय है। उन्होंने लोगों से अपील की, कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी सरकारी काम करने के लिए रिश्वत मांगता है, तो तुरंत इसकी जानकारी एसीबी के टोल फ्री नंबर 1800-180-2022 और 1064 पर दें।

