करनाल जिला के बसताड़ा टोल प्लाजा पर सीएम फ्लाइंग ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने गेंहू से भरे दो ट्रकों को पकड़ लिया जिसमें दोनों ही ट्रकों में सरकारी गेहूं था। गेहूं के ट्रक इंद्री की फ्लोर मिल में जाने थे, लेकिन ट्रेडिंग के माध्यम से गेहूं के कट्टो को बेच दिया गया। गेहूं की सरकारी मिल में पिसाई होने के बाद आटा गरीब परिवारों तक पहुंचना था, लेकिन बीच में बैठे मिल संचालक अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके गरीबों के मुंह का निवाला डकारना चाह रहे थे।
लेकिन सीएम फ्लाइंग ने समय पर कार्रवाई करते हुए दोनों ट्रकों को पकड़ लिया। वहीं टीम द्वारा मामले की जांच शुरू भी कर दी गई। अब जांच में संबधित विभाग के अधिकारियों व मिल संचालक को भी जांच में शामिल किया जाएगा। सरकार गरीबों तक सस्ता आटा पहुंचाना चाहती है। इसके लिए केंद्र सरकार ने भारत आटा स्कीम शुरू की है। सरकारी एजेंसी हैफेड के गोदाम से गेहूं की डिलीवरी की जा रही है।
एफसीआई ने किया था 50 हजार क्विंटल गेहूं अलॉट
इंद्री की फार्मर शील्ड एग्रो फ्लोर मिल द्वारा गेहूं की पिसाई का काम किया जाना है। एफसीआई ने 50 हजार क्विंटल गेहूं अलॉट की थी। हैफेड के गोदाम से दो ट्रकों में 1200 कट्टे में गेहूं लोड हुई थी। जिसको इंद्री मिल में जाना था, लेकिन ट्रकों का रुख सोनीपत की तरफ हो गया।
दरअसल, मिल संचालकों ने सरकारी गेहूं का आटा तैयार करने की बजाए ट्रेडिंग के जरिए बेचना शुरू कर दिया। CM फ्लाइंग और गुप्तचर विभाग की टीम को ट्रेडिंग के जरिए गेहूं के कट्टे बेचे जाने की भनक लगी। बीती शाम ही CM फ्लाइंग की टीम ने बसताड़ा टोल प्लाजा पर दोनों ट्रकों को काबू कर लिया और अपने कब्जे में लेकर जांच तेज कर दी थी।
मिल मालिक ने ड्राइवरों को दिए फर्जी बिल
टीम के अधिकारियों की मुताबिक आटा मिल मालिक के पास ट्रक हैफेड के गोदाम से पहुंचे, लेकिन मिल मालिक ने चालाकी दिखाते हुए गोदाम से मिल गेट पास तो अपने पास रख लिए और ड्राइवरों को फर्जी बिल थमा दिए। उन्हें सोनीपत की तरफ रवाना कर दिया, लेकिन सीएम फ्लाइंग की मुस्तैदी से घोटाले का पर्दाफाश हो गया। जब टीम ने बसताड़ा टोल प्लाजा पर दोनों ट्रकों को पकड़ा और ड्राइवरों के पास मौजूद बिलों की चेकिंग की गई तो पूरा खेल ही साफ हो गया। बिल फर्जी थे।
सीएम फ्लाइंग की टीम ने हैफेड और एपसीआई के अधिकारियों को मौके पर बुला लिया था। ट्रकों के ड्राइवरों से थोड़ी सख्ती के साथ पूछताछ की गई तो दोनों ड्राइवरों ने पोपट की तरफ सच्चाई उगल दी और बताया कि यह गेहूं भारत आटा स्कीम वाला ही है।
ब्रांडेड कंपनियों का आटा है 40 से 60 रुपये प्रति किलो
केंद्र सरकार आम आदमी को ब्रांडेड आटा 27.50 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध करवा रही है जबकि अन्य ब्रांडेड कंपनियों का आटा 40 से 60 रुपए प्रति किलो है। आटा सहकारी समितियों एनएफईडी, एनसीएफ और केंद्रीय भंडार के माध्यम से देश में 800 मोबाइल वैन और दो हजार से ज्यादा दुकानों के माध्यम से बेचा जाना है। ऐसे में स्कीम के तहत प्राइवेट आटा मिलों को 2150 रुपए प्रति क्विंटल पर गेहूं दिया जा रहा है, जबकि वर्तमान रेट 2800 रुपए है। गेहूं पर 650 रुपए की छूट है और इसी का फायदा आटा मिल मालिक उठाना चाह रहे हैं।
इसका जवाब हमारे पास नहीं
अब जब इस बारे में हैफेड के अधिकारियों से बात की गई तो उनका जवाब था कि ट्रक सोनीपत कैसे और क्यों भेजे गए, इसका जवाब हमारे पास नहीं है। इसका जवाब मिल मालिक या फिर एफसीआई दे पाएगी। हैफेड अधिकारी धर्मबीर सिंह ने माना कि सीएम फ्लाइंग ने जिन ट्रकों को पकड़ा है उसमें सरकारी गेहूं था और वह हेफैड के गोदाम से ही लोड हुआ था। दोनों ट्रकों को आटा मिल में ले जाया जाना था, लेकिन सोनीपत कैसे गए, इसका जवाब उनके पास नहीं है, वह एफसीआई और मिल मालिक देगा।