Punjab और Haryana हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है, जिसके तहत ढोलीदारों को दिए गए जमीन के मालिकाना हक पर कैंची चलाई गई थी। ढोलीदार वे व्यक्ति होते हैं, जिन्हें धार्मिक उपहार के रूप में छोटा सा भूखंड प्राप्त होता है, और वे उसे उपयोग करने और उत्तराधिकार प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं।
हाईकोर्ट ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि सरकार द्वारा किए गए संशोधन ने मनमाने तरीके से भूमि अधिकारों को छीन लिया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी की पीठ ने यह भी माना कि यह संशोधन भारत के संविधान के अनुच्छेद 31-ए के तहत भूमि अधिग्रहण और कृषि सुधार के रूप में योग्य नहीं था।
संशोधन 2022 में किया गया था
हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले वकीलों ने यह तर्क दिया कि 23 अगस्त 2022 की अधिसूचना के तहत किए गए संशोधन ने 2010 के अधिनियम के तहत ढोलीदारों को दिए गए अधिकारों को नकारा था। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह संशोधन 2011 से लागू होने के बावजूद उन अधिकारों को अवैध रूप से प्रभावित कर रहा था।
कोर्ट ने असंवैधानिक बताया संशोधन को
हाईकोर्ट ने यह निर्णय सुनाया कि बिना उचित मुआवजे या सुनवाई के संपत्ति के अधिकारों को मनमाने तरीके से नकारना असंवैधानिक है। कोर्ट ने कहा कि इस संशोधन के द्वारा किए गए भूमि लेन-देन को रद्द करना, यहां तक कि 2010 के अधिनियम के तहत किए गए लेन-देन को भी, संविधान के खिलाफ है।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह संशोधन कोई कृषि सुधार नहीं था, बल्कि यह ढोलीदारों से उनके मालिकाना हक को छीनने का एक उपाय था, जो एक जब्ती प्रक्रिया के रूप में सामने आया।





