➤इंदिरा गांधी हत्या मामले के दोषी बेअंत सिंह की बेटी उपचुनाव लड़ेंगी
➤अमृत कौर आजाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में
➤परिवार का राजनीति में पुराना इतिहास
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दोषी रहे बेअंत सिंह की बेटी अमृत कौर मलोया ने राजनीति में कदम रखने का बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने पंजाब की तरनतारन सीट से उपचुनाव में किस्मत आजमाने का ऐलान किया है। यह सीट पूर्व विधायक डॉ. कश्मीर सिंह के निधन के बाद खाली हुई है। हालांकि अभी तक चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
अमृत कौर मलोया का चुनाव लड़ने का फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने किसी पार्टी का साथ लेने के बजाय स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का निर्णय किया है। यह परिवार में दूसरी बार है जब किसी संतान ने चुनावी राजनीति में कदम रखा है। उनके भाई सर्बजीत सिंह खालसा इस समय फरीदकोट से सांसद हैं और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे के सक्रिय सदस्य भी हैं। बावजूद इसके, अमृत कौर ने भाई की पार्टी से दूरी बनाकर स्वतंत्र रूप से समर्थन जुटाने की रणनीति बनाई है।
अमृत कौर का कहना है कि वे सभी राजनीतिक दलों से समर्थन मांगेंगी और प्रयास करेंगी कि अधिक से अधिक दल उनके पक्ष में आएं। इससे पहले, इस परिवार के कई सदस्य राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उनकी मां और बेअंत सिंह की पत्नी बिमल कौर ने 1989 में रोपड़ से लोकसभा चुनाव जीता था। इसी चुनाव में उनके दादा बाबा सुच्चा सिंह ने बठिंडा से जीत दर्ज की थी।
इसके अलावा, राजनीतिक चर्चाओं में यह भी अनुमान लगाया जा रहा था कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा भी अमृतपाल सिंह की पार्टी से मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि खालड़ा मिशन ऑर्गेनाइजेशन ने इन अटकलों का खंडन करते हुए साफ कर दिया है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगी।
वर्तमान में इस सीट पर प्रमुख पार्टियों ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी ने हरमीत सिंह संधू, अकाली दल ने सुखविंदर कौर रंधावा और भारतीय जनता पार्टी ने हरजीत सिंह संधू को मैदान में उतारा है। आने वाले दिनों में अमृत कौर की उम्मीदवारी तरनतारन की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकती है।