हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी पार्टी के बीच सवा 4 साल से चल रहे गठबंधन के मंगलवार को टूट जाने पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद ने टिप्पणी की। दीपेंद्र ने अपने एक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि 3 महीने पहले मैंने सिरसा में रिएक्शन दे दिया था।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि मैंने प्रदेशवासियों को बता दिया था कि बीजेपी-जेजेपी में समझौता तोड़ने का अघोषित समझौता हो गया है। इस बार बीजेपी के इशारे पर जेजेपी और इनेलो वाले कांग्रेस की वोट में सेंध मारने अलग से फिर आएंगे। जो भी हो रहा, हरियाणा की जनभावना के दबाव में हो रहा। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जो फिलहाल हरियाणा में हो रहा है, वो हरियाणा की जनभावना के दबाव में हो रहा है।

हरियाणा की जनता ने मन परिवर्तन का बना लिया है। हर वर्ग नाराज और निराश है। जन-जन से आवाज आ रही है। हरियाणा में बदलाव तय है। एक बार ये घटनाक्रम हो जाने दीजिए, उसके बाद हम अपनी बात विस्तार से रखेंगे।
शुरू से गठबंधन पर निशाना साध रहे थे कांग्रेसी नेता
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा ने इस गठबंधन को बेमेल का गठबंधन तक बताया। हालांकि सवा चार साल तक दोनों पार्टियों ने प्रदेश में सरकार चलाई। जेजेपी कोटे से खुद दुष्यंत चौटाला डिप्टी सीएम बने थे, लेकिन लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही दोनों ही पार्टियों की राह अलग हो गई। प्रदेश में अगर जेजेपी अलग चुनाव लड़ती है, तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस पार्टी को होगा। जिस वोट बैंक पर जेजेपी की पकड़ है, उसी वोट बैंक पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत नजर आ रही थी।

समझौता रहता तो वोट बैंक कन्वर्ट होना था मुश्किल
दरअसल हरियाणा में जाट वोट बैंक के दम पर ही 2019 के चुनाव में जेजेपी को 10 सीटें मिली थी। इस बार दोनों पार्टियों को अभास हो गया था कि समझौता रहा तो ये वोट बैंक कन्वर्ट होना मुश्किल है। अगर जेजेपी अलग होकर चुनाव लड़ेगी तो वह इसी वोट बैंक में सेंधमारी करेगी। जिससे कांग्रेस और बीजेपी को फायदा होने की संभावनाएं दिख रही है।
